search
Q: निम्नलिखित में से किसने नाइटहुड की उपाधि को अस्वीकार किया और भारत के लिए काउंसिल ऑफ दि सेक्रेटरी ऑफ स्टेट में पद ग्रहण करना अस्वीकार किया?
  • A. मोतीलाल नेहरू
  • B. एम.जी. रानाडे
  • C. जी.के. गोखले
  • D. बी.जी. तिलक
Correct Answer: Option B - महादेव गोविन्द रानाडे ने नाइटहुड की उपाधि को अस्वीकार किया और भारत के लिए काउन्सिल ऑफ दि सेक्रेटरी ऑफ स्टेट में पद ग्रहण करना अस्वीकार किया। इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में सहयोग प्रदान किया था। दक्कन शिक्षा समिति या दक्कन एजूकेशन सोसाइटी की स्थापना का श्रेय भी इन्हें प्राप्त है। ये पूना के उप न्यायाधीश, बम्बई विधानपरिषद् के सदस्य और बाद में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनाये गये। महादेव गोविन्द रानाडे को महाराष्ट्र के सुकरात के रूप में जाना जाता है। इनकी मुख्य रचनाएँ हैं- पुनर्विवाह, मालगुजारी कानून, राजा राममोहन राय की जीवनी।
B. महादेव गोविन्द रानाडे ने नाइटहुड की उपाधि को अस्वीकार किया और भारत के लिए काउन्सिल ऑफ दि सेक्रेटरी ऑफ स्टेट में पद ग्रहण करना अस्वीकार किया। इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में सहयोग प्रदान किया था। दक्कन शिक्षा समिति या दक्कन एजूकेशन सोसाइटी की स्थापना का श्रेय भी इन्हें प्राप्त है। ये पूना के उप न्यायाधीश, बम्बई विधानपरिषद् के सदस्य और बाद में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनाये गये। महादेव गोविन्द रानाडे को महाराष्ट्र के सुकरात के रूप में जाना जाता है। इनकी मुख्य रचनाएँ हैं- पुनर्विवाह, मालगुजारी कानून, राजा राममोहन राय की जीवनी।

Explanations:

महादेव गोविन्द रानाडे ने नाइटहुड की उपाधि को अस्वीकार किया और भारत के लिए काउन्सिल ऑफ दि सेक्रेटरी ऑफ स्टेट में पद ग्रहण करना अस्वीकार किया। इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में सहयोग प्रदान किया था। दक्कन शिक्षा समिति या दक्कन एजूकेशन सोसाइटी की स्थापना का श्रेय भी इन्हें प्राप्त है। ये पूना के उप न्यायाधीश, बम्बई विधानपरिषद् के सदस्य और बाद में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनाये गये। महादेव गोविन्द रानाडे को महाराष्ट्र के सुकरात के रूप में जाना जाता है। इनकी मुख्य रचनाएँ हैं- पुनर्विवाह, मालगुजारी कानून, राजा राममोहन राय की जीवनी।