Correct Answer:
Option C - नरपति नाल्ह कृत `बीसलदेव रासो' मूलत: एक मुक्तक गेय काव्य है। `बीसलदेव रासो' आदिकालीन रासो काव्य परम्परा की शृंगारिक रचना है। इसमें भोज परमार की पुत्री राजमती एवं अजमेर के चौहान राजा बीसलदेव तृतीय के विवाह, वियोग एवं पुर्निमलन की कथा सरस शैली में प्रस्तुत की गई है। आदिकालीन रचना `बीसलदेव रासो' की शृंगार परम्परा विद्यापति और भक्ति काल के प्रेमाख्यानक काव्यों से होते हुए रीतिकाल के शृंगार काव्य के रूप में चरम विकास को प्राप्त हुई।
C. नरपति नाल्ह कृत `बीसलदेव रासो' मूलत: एक मुक्तक गेय काव्य है। `बीसलदेव रासो' आदिकालीन रासो काव्य परम्परा की शृंगारिक रचना है। इसमें भोज परमार की पुत्री राजमती एवं अजमेर के चौहान राजा बीसलदेव तृतीय के विवाह, वियोग एवं पुर्निमलन की कथा सरस शैली में प्रस्तुत की गई है। आदिकालीन रचना `बीसलदेव रासो' की शृंगार परम्परा विद्यापति और भक्ति काल के प्रेमाख्यानक काव्यों से होते हुए रीतिकाल के शृंगार काव्य के रूप में चरम विकास को प्राप्त हुई।