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Q: निम्नलिखित में से किस रस का स्थायी भाव ‘रति’ है?
  • A. शृंगार रस
  • B. शान्त रस
  • C. भक्ति रस
  • D. अद्भुत रस
Correct Answer: Option A - ‘शृंगार रस’ का स्थायी भाव ‘रति’ है। ‘रस की उत्पत्ति मन की विभिन्न प्रवृत्तियों से होती है। इन प्रवृत्तियों को स्थायी भाव कहते हैं।’ सर्वप्रथम भरतमुनि ने 8 स्थायी भावों की चर्चा की थी किन्तु परवर्ती आचार्य मम्मट एवं अभिनव गुप्त ने शांत रस के निर्वेद नामक भाव को भी स्थायी भाव माना। रस स्थायी भाव शृंगार रति हास्य हास रौद्र क्रोध करुण शोक वीभत्स जुगुप्सा भयानक भय वीर उत्साह शांत निर्वेद अद्भुत विस्मय
A. ‘शृंगार रस’ का स्थायी भाव ‘रति’ है। ‘रस की उत्पत्ति मन की विभिन्न प्रवृत्तियों से होती है। इन प्रवृत्तियों को स्थायी भाव कहते हैं।’ सर्वप्रथम भरतमुनि ने 8 स्थायी भावों की चर्चा की थी किन्तु परवर्ती आचार्य मम्मट एवं अभिनव गुप्त ने शांत रस के निर्वेद नामक भाव को भी स्थायी भाव माना। रस स्थायी भाव शृंगार रति हास्य हास रौद्र क्रोध करुण शोक वीभत्स जुगुप्सा भयानक भय वीर उत्साह शांत निर्वेद अद्भुत विस्मय

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‘शृंगार रस’ का स्थायी भाव ‘रति’ है। ‘रस की उत्पत्ति मन की विभिन्न प्रवृत्तियों से होती है। इन प्रवृत्तियों को स्थायी भाव कहते हैं।’ सर्वप्रथम भरतमुनि ने 8 स्थायी भावों की चर्चा की थी किन्तु परवर्ती आचार्य मम्मट एवं अभिनव गुप्त ने शांत रस के निर्वेद नामक भाव को भी स्थायी भाव माना। रस स्थायी भाव शृंगार रति हास्य हास रौद्र क्रोध करुण शोक वीभत्स जुगुप्सा भयानक भय वीर उत्साह शांत निर्वेद अद्भुत विस्मय