Correct Answer:
Option B - `उपादान लक्षणा' का ``अजहत्स्वार्थ लक्षणा'' भी कहते हैं। उपादान लक्षणा साहित्य में लक्षणा का वह प्रकार या भेद है, जिसमें मुख्य अर्थ ज्यों का त्यों बना रहने पर भी साथ में कोई और अर्थ भी ग्रहण कर लेता है।
B. `उपादान लक्षणा' का ``अजहत्स्वार्थ लक्षणा'' भी कहते हैं। उपादान लक्षणा साहित्य में लक्षणा का वह प्रकार या भेद है, जिसमें मुख्य अर्थ ज्यों का त्यों बना रहने पर भी साथ में कोई और अर्थ भी ग्रहण कर लेता है।