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Q: निम्नलिखित में से किस जीवाणु के कारण पेप्टिक अल्सर (जठरव्रण) होता है?
  • A. लैक्टोबैसिलस बल्गेरिकस
  • B. स्ट्रेप्टोकॉकस थर्मोफाइलस
  • C. हेलिकोबैक्टर पाइलोरी
  • D. लैक्टोबैसिलस एसिडोफाइलस
Correct Answer: Option C - हेलिकोबैक्टर पाइलोरी के कारण पेप्टिक अल्सर होता है। पेप्टिक अल्सर खुले घाव होते हैं जो पेट की अंदरूनी परत और छोटी आंत के ऊपरी हिस्से पर विकसित होते है। इसका साधारण लक्षण लगातार पेट में दर्द और जलन होना है। अम्ल तथा पेट द्वारा बनाये गये अन्य रस, पाचन पथ के अस्तर (अंदरुनी परत) को जलाकर अल्सर होने में योगदान कर सकते है। यह तब घटित होता है जब शरीर में बहुत अधिक अम्ल बनता है या पाचन पथ का अस्तर किसी वजह से क्षतिग्रस्त हो जाता है।
C. हेलिकोबैक्टर पाइलोरी के कारण पेप्टिक अल्सर होता है। पेप्टिक अल्सर खुले घाव होते हैं जो पेट की अंदरूनी परत और छोटी आंत के ऊपरी हिस्से पर विकसित होते है। इसका साधारण लक्षण लगातार पेट में दर्द और जलन होना है। अम्ल तथा पेट द्वारा बनाये गये अन्य रस, पाचन पथ के अस्तर (अंदरुनी परत) को जलाकर अल्सर होने में योगदान कर सकते है। यह तब घटित होता है जब शरीर में बहुत अधिक अम्ल बनता है या पाचन पथ का अस्तर किसी वजह से क्षतिग्रस्त हो जाता है।

Explanations:

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी के कारण पेप्टिक अल्सर होता है। पेप्टिक अल्सर खुले घाव होते हैं जो पेट की अंदरूनी परत और छोटी आंत के ऊपरी हिस्से पर विकसित होते है। इसका साधारण लक्षण लगातार पेट में दर्द और जलन होना है। अम्ल तथा पेट द्वारा बनाये गये अन्य रस, पाचन पथ के अस्तर (अंदरुनी परत) को जलाकर अल्सर होने में योगदान कर सकते है। यह तब घटित होता है जब शरीर में बहुत अधिक अम्ल बनता है या पाचन पथ का अस्तर किसी वजह से क्षतिग्रस्त हो जाता है।