Explanations:
फगुआ उत्तर प्रदेश का लोकनृत्य नहीं है। चरकुला नृत्य – ब्रज क्षेत्र में यह नृत्य होली के आस-पास होता है। इसमें महिलायें 108 दीपकों का चारुकला (पिंजरा) सिर पर रखकर नृत्य करती है। करमा (कर्मा) नृत्य– सोनभद्र व मिर्जापुर के खरवार आदिवासी लोगों द्वारा खरीफ फसल बोने के बाद होली के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है यह पुरुषार्थ व पर्यावरण का प्रतीक नृत्य है। पाई डण्डा मौनिया नृत्य–बुन्देलखण्ड के अहीर समाज का यह एक पारम्परिक नृत्य है। इसे `बुन्देलखण्ड का डांडिया’ भी कहा जाता है।