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Q: निम्नलिखित में से कौन उत्तर प्रदेश का लोक नृत्य नहींं है?
  • A. चरकुला
  • B. कर्मा
  • C. फगुआ
  • D. पाई-डंडा
Correct Answer: Option C - फगुआ उत्तर प्रदेश का लोकनृत्य नहींं है। चरकुला नृत्य – ब्रज क्षेत्र में यह नृत्य होली के आस-पास होता है। इसमें महिलायें 108 दीपकों का चारुकला (पिंजरा) सिर पर रखकर नृत्य करती हैं। करमा (कर्मा) नृत्य– सोनभद्र व मिर्जापुर के खरवार आदिवासी लोगों द्वारा खरीफ फसल बोने के बाद दीपावली के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है यह पुरुषार्थ व पर्यावरण का प्रतीक नृत्य है। पाई डण्डा मौनिया नृत्य–बुन्देलखण्ड के अहीर समाज का यह एक पारम्परिक नृत्य है। इसे `बुन्देलखण्ड का डांडिया’ भी कहा जाता है।
C. फगुआ उत्तर प्रदेश का लोकनृत्य नहींं है। चरकुला नृत्य – ब्रज क्षेत्र में यह नृत्य होली के आस-पास होता है। इसमें महिलायें 108 दीपकों का चारुकला (पिंजरा) सिर पर रखकर नृत्य करती हैं। करमा (कर्मा) नृत्य– सोनभद्र व मिर्जापुर के खरवार आदिवासी लोगों द्वारा खरीफ फसल बोने के बाद दीपावली के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है यह पुरुषार्थ व पर्यावरण का प्रतीक नृत्य है। पाई डण्डा मौनिया नृत्य–बुन्देलखण्ड के अहीर समाज का यह एक पारम्परिक नृत्य है। इसे `बुन्देलखण्ड का डांडिया’ भी कहा जाता है।

Explanations:

फगुआ उत्तर प्रदेश का लोकनृत्य नहींं है। चरकुला नृत्य – ब्रज क्षेत्र में यह नृत्य होली के आस-पास होता है। इसमें महिलायें 108 दीपकों का चारुकला (पिंजरा) सिर पर रखकर नृत्य करती हैं। करमा (कर्मा) नृत्य– सोनभद्र व मिर्जापुर के खरवार आदिवासी लोगों द्वारा खरीफ फसल बोने के बाद दीपावली के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है यह पुरुषार्थ व पर्यावरण का प्रतीक नृत्य है। पाई डण्डा मौनिया नृत्य–बुन्देलखण्ड के अहीर समाज का यह एक पारम्परिक नृत्य है। इसे `बुन्देलखण्ड का डांडिया’ भी कहा जाता है।