Correct Answer:
Option A - अथर्ववेद को ब्रह्मवेद भी कहा जाता है। अथर्वा ऋषि के नाम पर इस वेद का नाम अथर्ववेद पड़ा। इस वेद की रचना सबसे बाद में हुई। इसमें 20 अध्याय, 731/730 सूक्त व 5987 मंत्र है। इसमें वशीकरण, जादू–टोना, भूत–प्रेतों व औषधियों से सम्बन्धित मन्त्रों का वर्णन है। काशी का प्राचीनतम उल्लेख अथर्ववेद में ही मिलता है।
A. अथर्ववेद को ब्रह्मवेद भी कहा जाता है। अथर्वा ऋषि के नाम पर इस वेद का नाम अथर्ववेद पड़ा। इस वेद की रचना सबसे बाद में हुई। इसमें 20 अध्याय, 731/730 सूक्त व 5987 मंत्र है। इसमें वशीकरण, जादू–टोना, भूत–प्रेतों व औषधियों से सम्बन्धित मन्त्रों का वर्णन है। काशी का प्राचीनतम उल्लेख अथर्ववेद में ही मिलता है।