Correct Answer:
Option A - स्वाइन फ्लू एच 1 एन 1 (H1 N1) वायरस के कारण होता है। यह वायरस सुअरों की श्वासनली (श्वसन तंत्र) को संक्रमित करता है तथा बाद में यह वायरस मनुष्य में संचारित हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप नाक बहना, खाँसी, भूख में कमी और व्यवहार में बेचैनी होती है। स्वाइन फ्लू की पहचान सन् 2009 में की गई थी।
⦁ इबोला, वायरस जनित बीमारी का नाम अफ्रीका के कांगो गणतांत्रिक में बहने वाली इबोला नदी के नाम पर रखा गया। इस वायरस की सर्वप्रथम खोज 1976 में हुई थी। इस बीमारी में शरीर में नसों से खून बाहर आना शुरू हो जाता है, जिससे अंदरूनी रक्तस्त्राव प्रारम्भ हो जाता है। यह एक अत्यन्त घातक रोग है। इससे 10% रोगियों की मृत्यु हो जाती है।
⦁ मारबर्ग वायरस जनित बीमारी फिलोविरिडे परिवार का एक रक्तस्त्रावी वायरस जनित बुखार है। मारबर्ग वायरस (MARV) मनुष्यों और प्राइमेट्स में मारबर्ग वायरस रोग का कारण बनता है, जो वायरल रक्तस्त्रावी बुखार का एक रूप है।
A. स्वाइन फ्लू एच 1 एन 1 (H1 N1) वायरस के कारण होता है। यह वायरस सुअरों की श्वासनली (श्वसन तंत्र) को संक्रमित करता है तथा बाद में यह वायरस मनुष्य में संचारित हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप नाक बहना, खाँसी, भूख में कमी और व्यवहार में बेचैनी होती है। स्वाइन फ्लू की पहचान सन् 2009 में की गई थी।
⦁ इबोला, वायरस जनित बीमारी का नाम अफ्रीका के कांगो गणतांत्रिक में बहने वाली इबोला नदी के नाम पर रखा गया। इस वायरस की सर्वप्रथम खोज 1976 में हुई थी। इस बीमारी में शरीर में नसों से खून बाहर आना शुरू हो जाता है, जिससे अंदरूनी रक्तस्त्राव प्रारम्भ हो जाता है। यह एक अत्यन्त घातक रोग है। इससे 10% रोगियों की मृत्यु हो जाती है।
⦁ मारबर्ग वायरस जनित बीमारी फिलोविरिडे परिवार का एक रक्तस्त्रावी वायरस जनित बुखार है। मारबर्ग वायरस (MARV) मनुष्यों और प्राइमेट्स में मारबर्ग वायरस रोग का कारण बनता है, जो वायरल रक्तस्त्रावी बुखार का एक रूप है।