Correct Answer:
Option D - उष्णकटिबंधीय पूर्वी धाराएँ दक्षिण पश्चिम मानसून की शुरुआत करती है।
• मई के महीने में उत्तरी पश्चिमी मैदानों में तापमान के तेजी से बढ़ने के कारण निम्न वायुदाब की दशाएँ और अधिक बढ़ने लगती है। जून के आरम्भ में ये दशायें इतनी शक्तिशाली हो जाती है कि वे हिन्दमहासागर से जाने वाली दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यापारिक पवनों को आकर्षित कर लेती है ये दक्षिण पूर्वी व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा को पार करके बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में प्रवेश करती हैं। जहाँ ये भारत के ऊपर विद्यमान वायुपरिसंचरण में मिल जाती है। भूमध्यरेखीय गर्म समुद्री धाराओं के ऊपर से गुजरने के कारण ये पवनें अपने साथ पर्याप्त मात्रा में आद्र्रता ले आती है। भूमध्य रेखा को पार करके इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम हो जाती है इसी कारण इन्हे दक्षिण पश्चिम मानसून कहा जाता है।
D. उष्णकटिबंधीय पूर्वी धाराएँ दक्षिण पश्चिम मानसून की शुरुआत करती है।
• मई के महीने में उत्तरी पश्चिमी मैदानों में तापमान के तेजी से बढ़ने के कारण निम्न वायुदाब की दशाएँ और अधिक बढ़ने लगती है। जून के आरम्भ में ये दशायें इतनी शक्तिशाली हो जाती है कि वे हिन्दमहासागर से जाने वाली दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यापारिक पवनों को आकर्षित कर लेती है ये दक्षिण पूर्वी व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा को पार करके बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में प्रवेश करती हैं। जहाँ ये भारत के ऊपर विद्यमान वायुपरिसंचरण में मिल जाती है। भूमध्यरेखीय गर्म समुद्री धाराओं के ऊपर से गुजरने के कारण ये पवनें अपने साथ पर्याप्त मात्रा में आद्र्रता ले आती है। भूमध्य रेखा को पार करके इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम हो जाती है इसी कारण इन्हे दक्षिण पश्चिम मानसून कहा जाता है।