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Q: निम्नलिखित में से कौन सा पूर्व क्रियात्मक अवस्था काल के बच्चे को विशेषित करता है?
  • A. लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार
  • B. विलंबित अनुकरण
  • C. विचारों की अनुत्क्रमणीयता
  • D. वर्तुल प्रतिक्रिया
Correct Answer: Option C - पूर्व क्रियात्मक अवस्था लगभग 2 वर्ष से प्रारम्भ होकर सात वर्ष तक चलती है। इस अवस्था को दो भागों में बाँटा जा सकता है– (i) पूर्व प्रत्ययात्मक काल (2-4 वर्ष) (ii) आंत प्रज्ञ काल (4-7 वर्ष) (i) पूर्व प्रत्ययात्मक काल (2-4 वर्ष)–इसे खोज की अवस्था भी कहा जाता है तथा इस अवस्था में भाषा विकास का विशेष महत्व रहता है। (ii) आंत प्रज्ञ काल (4-7 वर्ष)–आंत प्रज्ञ चिंतन से पियाजे का तात्पर्य बिना किसी तार्किक विचार प्रक्रिया के किसी वस्तु या बात को मस्तिष्क के द्वारा तुरंत स्वीकार कर लेने से है। इस अवस्था में विचार प्रक्रिया अनुत्क्रमणीय होती है अर्थात बालक मानसिक क्रम के प्रारम्भिक बिन्दु पर पुन: नहीं लौट पाता है। उदाहरण के लिए यदि दो समान लम्बाई की छड़ी को आगे पीछे रखकर बच्चे से पूछा जाये कि कौन सी लम्बी छड़ी है तो वह बतायेगा कि आगे वाली छड़ी लम्बी है। जो कि गलत उत्तर होगा।
C. पूर्व क्रियात्मक अवस्था लगभग 2 वर्ष से प्रारम्भ होकर सात वर्ष तक चलती है। इस अवस्था को दो भागों में बाँटा जा सकता है– (i) पूर्व प्रत्ययात्मक काल (2-4 वर्ष) (ii) आंत प्रज्ञ काल (4-7 वर्ष) (i) पूर्व प्रत्ययात्मक काल (2-4 वर्ष)–इसे खोज की अवस्था भी कहा जाता है तथा इस अवस्था में भाषा विकास का विशेष महत्व रहता है। (ii) आंत प्रज्ञ काल (4-7 वर्ष)–आंत प्रज्ञ चिंतन से पियाजे का तात्पर्य बिना किसी तार्किक विचार प्रक्रिया के किसी वस्तु या बात को मस्तिष्क के द्वारा तुरंत स्वीकार कर लेने से है। इस अवस्था में विचार प्रक्रिया अनुत्क्रमणीय होती है अर्थात बालक मानसिक क्रम के प्रारम्भिक बिन्दु पर पुन: नहीं लौट पाता है। उदाहरण के लिए यदि दो समान लम्बाई की छड़ी को आगे पीछे रखकर बच्चे से पूछा जाये कि कौन सी लम्बी छड़ी है तो वह बतायेगा कि आगे वाली छड़ी लम्बी है। जो कि गलत उत्तर होगा।

Explanations:

पूर्व क्रियात्मक अवस्था लगभग 2 वर्ष से प्रारम्भ होकर सात वर्ष तक चलती है। इस अवस्था को दो भागों में बाँटा जा सकता है– (i) पूर्व प्रत्ययात्मक काल (2-4 वर्ष) (ii) आंत प्रज्ञ काल (4-7 वर्ष) (i) पूर्व प्रत्ययात्मक काल (2-4 वर्ष)–इसे खोज की अवस्था भी कहा जाता है तथा इस अवस्था में भाषा विकास का विशेष महत्व रहता है। (ii) आंत प्रज्ञ काल (4-7 वर्ष)–आंत प्रज्ञ चिंतन से पियाजे का तात्पर्य बिना किसी तार्किक विचार प्रक्रिया के किसी वस्तु या बात को मस्तिष्क के द्वारा तुरंत स्वीकार कर लेने से है। इस अवस्था में विचार प्रक्रिया अनुत्क्रमणीय होती है अर्थात बालक मानसिक क्रम के प्रारम्भिक बिन्दु पर पुन: नहीं लौट पाता है। उदाहरण के लिए यदि दो समान लम्बाई की छड़ी को आगे पीछे रखकर बच्चे से पूछा जाये कि कौन सी लम्बी छड़ी है तो वह बतायेगा कि आगे वाली छड़ी लम्बी है। जो कि गलत उत्तर होगा।