Correct Answer:
Option B - बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के मामले में सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 तथा उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने का अधिकार है। इस रिट के तहत ऐसे व्यक्ति को त्वरित न्याय प्रदान किया जाता है जिसने बिना किसी कानूनी औचित्य के अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता खो दी है। यह रिट सार्वजनिक प्राधिकरणों या व्यक्तिगत दोनों के विरूद्ध जारी की जा सकती है।
B. बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के मामले में सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 तथा उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने का अधिकार है। इस रिट के तहत ऐसे व्यक्ति को त्वरित न्याय प्रदान किया जाता है जिसने बिना किसी कानूनी औचित्य के अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता खो दी है। यह रिट सार्वजनिक प्राधिकरणों या व्यक्तिगत दोनों के विरूद्ध जारी की जा सकती है।