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Q: निम्नलिखित में से कौन-सा मेरु-रज्जु का एक महत्वपूर्ण कार्य है?
  • A. द्रव्य स्थानांतरण
  • B. श्वसन नियंत्रण
  • C. प्रतिवर्ती क्रियाओंं का नियंत्रण
  • D. रक्त का पम्पन
Correct Answer: Option C - मेडुला ऑब्लांगेटा का पिछला भाग मेरूरज्जु बनाता है मेरूरज्जु का अंतिम सिरा एक पतले सूत्र के रूप में होता है मेरूरज्जु के चारों ओर ड्यूरोमेटर, आक्नायड और पॉयमेटर का बना आवरण पाया जाता है। मेरूरज्जु के दो प्रमुख कार्य हैं- (i) यह प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वयन करती है। (ii) यह मस्तिष्क में आने वाली उद्दीपनों का संवहन करती है। हृदय का तेज गति से स्पंदन, खाँसना पलकों का झपकना, ठंड से कॉपना आदि क्रियाएं प्रतिवर्ती क्रियाएँ हैं जो मेरूरज्जु द्वारा नियंत्रित होती रहती हैं।
C. मेडुला ऑब्लांगेटा का पिछला भाग मेरूरज्जु बनाता है मेरूरज्जु का अंतिम सिरा एक पतले सूत्र के रूप में होता है मेरूरज्जु के चारों ओर ड्यूरोमेटर, आक्नायड और पॉयमेटर का बना आवरण पाया जाता है। मेरूरज्जु के दो प्रमुख कार्य हैं- (i) यह प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वयन करती है। (ii) यह मस्तिष्क में आने वाली उद्दीपनों का संवहन करती है। हृदय का तेज गति से स्पंदन, खाँसना पलकों का झपकना, ठंड से कॉपना आदि क्रियाएं प्रतिवर्ती क्रियाएँ हैं जो मेरूरज्जु द्वारा नियंत्रित होती रहती हैं।

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मेडुला ऑब्लांगेटा का पिछला भाग मेरूरज्जु बनाता है मेरूरज्जु का अंतिम सिरा एक पतले सूत्र के रूप में होता है मेरूरज्जु के चारों ओर ड्यूरोमेटर, आक्नायड और पॉयमेटर का बना आवरण पाया जाता है। मेरूरज्जु के दो प्रमुख कार्य हैं- (i) यह प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वयन करती है। (ii) यह मस्तिष्क में आने वाली उद्दीपनों का संवहन करती है। हृदय का तेज गति से स्पंदन, खाँसना पलकों का झपकना, ठंड से कॉपना आदि क्रियाएं प्रतिवर्ती क्रियाएँ हैं जो मेरूरज्जु द्वारा नियंत्रित होती रहती हैं।