search
Q: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उल्कापिंड के बारे में सही है?
  • A. ये सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े हैं।
  • B. ये केवल मंगल और बृहस्पति की कक्षओं के बीच पाए जाते है।
  • C. इनके पास ऊष्मा तथा प्रकाश होता है।
  • D. इनके आकार को भू-आभ कहा जाता है।
Correct Answer: Option A - उल्का पिंड सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े हैं यह कथन सत्य है। कभी-कभी ये उल्का पिंड पृथ्वी के इतने नजदीक आ जाते हैं तथा इस प्रक्रिया के दौरान वायु के साथ घर्षण होने के कारण गर्म होकर जल जाते हैं, फलस्वरूप चमकदार प्रकाश उत्पन्न होता है। तारों, ग्रहों एवं उपग्रहों के अतिरिक्त असंख्य छोटे पिंड भी सूर्य के चारों ओर कक्षाओं के बीच पाये जाते हैं यह क्षुद्रग्रह ग्रह के ही भाग हैं जो बहुत पहले ग्रहों से टूटकर अलग हो गये। पृथ्वी ध्रुवों के पास थोड़ी चपटी है यही कारण है कि इसके आकार को भू-आभ कहा जाता है, भू-आभ का अर्थ पृथ्वी के समान आकार, जीवन के लिये अनुवूâल परिस्थितियाँ केवल पृथ्वी पर ही पायी जाती हैं यह सूर्य से दूरी की स्थिति में तीसरा और आकार में पाँचवा ग्रह है।
A. उल्का पिंड सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े हैं यह कथन सत्य है। कभी-कभी ये उल्का पिंड पृथ्वी के इतने नजदीक आ जाते हैं तथा इस प्रक्रिया के दौरान वायु के साथ घर्षण होने के कारण गर्म होकर जल जाते हैं, फलस्वरूप चमकदार प्रकाश उत्पन्न होता है। तारों, ग्रहों एवं उपग्रहों के अतिरिक्त असंख्य छोटे पिंड भी सूर्य के चारों ओर कक्षाओं के बीच पाये जाते हैं यह क्षुद्रग्रह ग्रह के ही भाग हैं जो बहुत पहले ग्रहों से टूटकर अलग हो गये। पृथ्वी ध्रुवों के पास थोड़ी चपटी है यही कारण है कि इसके आकार को भू-आभ कहा जाता है, भू-आभ का अर्थ पृथ्वी के समान आकार, जीवन के लिये अनुवूâल परिस्थितियाँ केवल पृथ्वी पर ही पायी जाती हैं यह सूर्य से दूरी की स्थिति में तीसरा और आकार में पाँचवा ग्रह है।

Explanations:

उल्का पिंड सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े हैं यह कथन सत्य है। कभी-कभी ये उल्का पिंड पृथ्वी के इतने नजदीक आ जाते हैं तथा इस प्रक्रिया के दौरान वायु के साथ घर्षण होने के कारण गर्म होकर जल जाते हैं, फलस्वरूप चमकदार प्रकाश उत्पन्न होता है। तारों, ग्रहों एवं उपग्रहों के अतिरिक्त असंख्य छोटे पिंड भी सूर्य के चारों ओर कक्षाओं के बीच पाये जाते हैं यह क्षुद्रग्रह ग्रह के ही भाग हैं जो बहुत पहले ग्रहों से टूटकर अलग हो गये। पृथ्वी ध्रुवों के पास थोड़ी चपटी है यही कारण है कि इसके आकार को भू-आभ कहा जाता है, भू-आभ का अर्थ पृथ्वी के समान आकार, जीवन के लिये अनुवूâल परिस्थितियाँ केवल पृथ्वी पर ही पायी जाती हैं यह सूर्य से दूरी की स्थिति में तीसरा और आकार में पाँचवा ग्रह है।