Correct Answer:
Option B - यजुर्वेद एक कर्मकाण्डीय वेद है। इसमें विभिन्न यज्ञों से संबंधित अनुष्ठानों व विधियों का उल्लेख है। यह वेद ‘गद्य’ एवं ‘पद्य’ दानों में रचित है। यजुर्वेद के कर्मकाण्डों को सम्पन्न कराने वाले पुरोहित को ‘अध्वर्यु’ कहा जाता था। यजुर्वेद की दो शाखाए हैं– शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद। शुक्ल यजुर्वेद को ‘वाजसनेयी संहिता’ भी कहते हैं। शुक्ल यजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रंथ ‘शतपथ’ व कृष्ण यजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रंथ ‘तैत्तिरीय’ है।
B. यजुर्वेद एक कर्मकाण्डीय वेद है। इसमें विभिन्न यज्ञों से संबंधित अनुष्ठानों व विधियों का उल्लेख है। यह वेद ‘गद्य’ एवं ‘पद्य’ दानों में रचित है। यजुर्वेद के कर्मकाण्डों को सम्पन्न कराने वाले पुरोहित को ‘अध्वर्यु’ कहा जाता था। यजुर्वेद की दो शाखाए हैं– शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद। शुक्ल यजुर्वेद को ‘वाजसनेयी संहिता’ भी कहते हैं। शुक्ल यजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रंथ ‘शतपथ’ व कृष्ण यजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रंथ ‘तैत्तिरीय’ है।