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Q: निम्नलिखित में से कौन भरतमुनि के रस सूत्र का एक व्याख्याकार नहीं है?
  • A. भट्ट लोलट
  • B. क्षेमेन्द्र
  • C. शंकुक
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - `नाट्यशास्त्र' के प्रणेता आचार्य भरतमुनि के प्रसिद्ध रस सूत्र `विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:' के प्रमुख व्याख्याकार भट्ट लोल्लट (नौवीं सदी), भट्टशंकुक (नौवीं सदी), भट्टनायक (ग्यारहवीं सदी) तथा अभिनवगुप्त (ग्यारहवीं सदी) हैं। भट्टलोल्लट का रस सिद्धान्त `उत्पत्तिवाद', भट्टशंकुक का रस सिद्धान्त `अनुमितिवाद', भट्टनायक का रस सिद्धान्त `भुक्तिवाद' तथा अभिनव गुप्त का रस सिद्धान्त `अभिव्यक्तिवाद' कहलाता है; जबकि आचार्य क्षेमेन्द्र औचित्य सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं और इनके काव्यशास्त्रीय ग्रंथ का नाम औचित्यविचारचर्चा है।
B. `नाट्यशास्त्र' के प्रणेता आचार्य भरतमुनि के प्रसिद्ध रस सूत्र `विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:' के प्रमुख व्याख्याकार भट्ट लोल्लट (नौवीं सदी), भट्टशंकुक (नौवीं सदी), भट्टनायक (ग्यारहवीं सदी) तथा अभिनवगुप्त (ग्यारहवीं सदी) हैं। भट्टलोल्लट का रस सिद्धान्त `उत्पत्तिवाद', भट्टशंकुक का रस सिद्धान्त `अनुमितिवाद', भट्टनायक का रस सिद्धान्त `भुक्तिवाद' तथा अभिनव गुप्त का रस सिद्धान्त `अभिव्यक्तिवाद' कहलाता है; जबकि आचार्य क्षेमेन्द्र औचित्य सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं और इनके काव्यशास्त्रीय ग्रंथ का नाम औचित्यविचारचर्चा है।

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`नाट्यशास्त्र' के प्रणेता आचार्य भरतमुनि के प्रसिद्ध रस सूत्र `विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:' के प्रमुख व्याख्याकार भट्ट लोल्लट (नौवीं सदी), भट्टशंकुक (नौवीं सदी), भट्टनायक (ग्यारहवीं सदी) तथा अभिनवगुप्त (ग्यारहवीं सदी) हैं। भट्टलोल्लट का रस सिद्धान्त `उत्पत्तिवाद', भट्टशंकुक का रस सिद्धान्त `अनुमितिवाद', भट्टनायक का रस सिद्धान्त `भुक्तिवाद' तथा अभिनव गुप्त का रस सिद्धान्त `अभिव्यक्तिवाद' कहलाता है; जबकि आचार्य क्षेमेन्द्र औचित्य सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं और इनके काव्यशास्त्रीय ग्रंथ का नाम औचित्यविचारचर्चा है।