Correct Answer:
Option B - `नाट्यशास्त्र' के प्रणेता आचार्य भरतमुनि के प्रसिद्ध रस सूत्र `विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:' के प्रमुख व्याख्याकार भट्ट लोल्लट (नौवीं सदी), भट्टशंकुक (नौवीं सदी), भट्टनायक (ग्यारहवीं सदी) तथा अभिनवगुप्त (ग्यारहवीं सदी) हैं। भट्टलोल्लट का रस सिद्धान्त `उत्पत्तिवाद', भट्टशंकुक का रस सिद्धान्त `अनुमितिवाद', भट्टनायक का रस सिद्धान्त `भुक्तिवाद' तथा अभिनव गुप्त का रस सिद्धान्त `अभिव्यक्तिवाद' कहलाता है; जबकि आचार्य क्षेमेन्द्र औचित्य सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं और इनके काव्यशास्त्रीय ग्रंथ का नाम औचित्यविचारचर्चा है।
B. `नाट्यशास्त्र' के प्रणेता आचार्य भरतमुनि के प्रसिद्ध रस सूत्र `विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:' के प्रमुख व्याख्याकार भट्ट लोल्लट (नौवीं सदी), भट्टशंकुक (नौवीं सदी), भट्टनायक (ग्यारहवीं सदी) तथा अभिनवगुप्त (ग्यारहवीं सदी) हैं। भट्टलोल्लट का रस सिद्धान्त `उत्पत्तिवाद', भट्टशंकुक का रस सिद्धान्त `अनुमितिवाद', भट्टनायक का रस सिद्धान्त `भुक्तिवाद' तथा अभिनव गुप्त का रस सिद्धान्त `अभिव्यक्तिवाद' कहलाता है; जबकि आचार्य क्षेमेन्द्र औचित्य सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं और इनके काव्यशास्त्रीय ग्रंथ का नाम औचित्यविचारचर्चा है।