Correct Answer:
Option D - शोभा मोहनेन जलं याचयामा। यह वाक्य अशुद्ध है।
द्विकर्मक धातुओं-दुह्, याच्, पच्, दण्ड, रुध्, प्रच्छ्, चि, ब्रू, शास्, जि, मथ्, मुष्, नी, हृ, कृष्, वह् के साथ द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
शोभा मोहनं जलं याचयामा। यह रुप शुद्ध है। मोहन में तृतीया का प्रयोग न होकर द्वितीया का प्रयोग उचित है।
D. शोभा मोहनेन जलं याचयामा। यह वाक्य अशुद्ध है।
द्विकर्मक धातुओं-दुह्, याच्, पच्, दण्ड, रुध्, प्रच्छ्, चि, ब्रू, शास्, जि, मथ्, मुष्, नी, हृ, कृष्, वह् के साथ द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
शोभा मोहनं जलं याचयामा। यह रुप शुद्ध है। मोहन में तृतीया का प्रयोग न होकर द्वितीया का प्रयोग उचित है।