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Q: निम्नलिखित में महाकाव्य के लक्षणों के विषय में एक कथन असत्य है
  • A. इसमें सभी नाटक सन्धियाँ होती है
  • B. इसमें सभी रस प्रधान रस के रूप में होते हैं
  • C. यह सर्गों में विभक्त होता है
  • D. इसके आरम्भ में देवादि को नमस्कार, आशीर्वाद या वस्तुनिर्देश होता है
Correct Answer: Option B - इसमें सभी रस प्रधान रस के रूप में होते हैं। महाकाव्य के लक्षणों के विषय में कथन असत्य है। आचार्य विश्वनाथ के अनुसार- जिसमें सर्गों का निबंधन हो___________श्रृंगार, वीर और शांत में से कोई एक रस प्रधान (अंगी) हो तथा अन्य सभी रस अंग रूप (सहायक/पूरक) हों, उसमें सब नाटकसंधियाँ हों, आरम्भ में नमस्कार, आशीर्वाद या वस्तुनिर्देश होता है तथा चतुर्वर्ग (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में से एक परिणाम होता है, वह महाकाव्य कहलाता है।
B. इसमें सभी रस प्रधान रस के रूप में होते हैं। महाकाव्य के लक्षणों के विषय में कथन असत्य है। आचार्य विश्वनाथ के अनुसार- जिसमें सर्गों का निबंधन हो___________श्रृंगार, वीर और शांत में से कोई एक रस प्रधान (अंगी) हो तथा अन्य सभी रस अंग रूप (सहायक/पूरक) हों, उसमें सब नाटकसंधियाँ हों, आरम्भ में नमस्कार, आशीर्वाद या वस्तुनिर्देश होता है तथा चतुर्वर्ग (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में से एक परिणाम होता है, वह महाकाव्य कहलाता है।

Explanations:

इसमें सभी रस प्रधान रस के रूप में होते हैं। महाकाव्य के लक्षणों के विषय में कथन असत्य है। आचार्य विश्वनाथ के अनुसार- जिसमें सर्गों का निबंधन हो___________श्रृंगार, वीर और शांत में से कोई एक रस प्रधान (अंगी) हो तथा अन्य सभी रस अंग रूप (सहायक/पूरक) हों, उसमें सब नाटकसंधियाँ हों, आरम्भ में नमस्कार, आशीर्वाद या वस्तुनिर्देश होता है तथा चतुर्वर्ग (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में से एक परिणाम होता है, वह महाकाव्य कहलाता है।