Correct Answer:
Option B - 20 वीं सदी के प्रारम्भ में श्री बाजे भगत जी, (श्री हरदेव के शिष्य थे) एक सुप्रसिद्ध सांगी हुए हैं। जिन्होंने सांग कला को न केवल नैतिक एवं सामाजिक ऊँचाई के संबंध में समृद्ध किया है। बल्कि इसमें वाक्य की शुद्धता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। पंडित लखमीचन्द और पं. मांगेराम में भी सांगी के रूप में प्रसिद्ध थे।
B. 20 वीं सदी के प्रारम्भ में श्री बाजे भगत जी, (श्री हरदेव के शिष्य थे) एक सुप्रसिद्ध सांगी हुए हैं। जिन्होंने सांग कला को न केवल नैतिक एवं सामाजिक ऊँचाई के संबंध में समृद्ध किया है। बल्कि इसमें वाक्य की शुद्धता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। पंडित लखमीचन्द और पं. मांगेराम में भी सांगी के रूप में प्रसिद्ध थे।