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Q: निम्नलिखित में किन जिलों को कपास की खेती के कारण `सफेद सोने’ का क्षेत्र कहते हैं?
  • A. रतलाम - खण्डवा
  • B. खण्डवा - खरगौन
  • C. उज्जैन - शाजापुर
  • D. धार - झाबुआ
Correct Answer: Option B - कपास उपोष्ण तथा उष्णकटिबन्धीय पौधा है। इसके लिए 21 से 25 सेन्टीग्रेड तापमान, 50 से 100 सेन्टीमीटर वर्षा एवं वर्ष में 200 पाला रहित दिनों की आवश्यकता होती है। इसकी खेती के लिए लावा से बनी काली मिट्टी सर्वोत्तम होती है। वैसे मध्य प्रदेश में मन्दसौर, नीमच, रतलाम, झाबुआ, बड़वानी, हरदा, धार, देवास, उज्जैन, रायगढ़, शाजापुर, खण्डवा इत्यादि जगहोें पर कपास की खेती की गयी है। खण्डवा-खरगौन जिले को कपास की खेती के लिए ‘सपेâद सोने का क्षेत्र कहते’ हैं।
B. कपास उपोष्ण तथा उष्णकटिबन्धीय पौधा है। इसके लिए 21 से 25 सेन्टीग्रेड तापमान, 50 से 100 सेन्टीमीटर वर्षा एवं वर्ष में 200 पाला रहित दिनों की आवश्यकता होती है। इसकी खेती के लिए लावा से बनी काली मिट्टी सर्वोत्तम होती है। वैसे मध्य प्रदेश में मन्दसौर, नीमच, रतलाम, झाबुआ, बड़वानी, हरदा, धार, देवास, उज्जैन, रायगढ़, शाजापुर, खण्डवा इत्यादि जगहोें पर कपास की खेती की गयी है। खण्डवा-खरगौन जिले को कपास की खेती के लिए ‘सपेâद सोने का क्षेत्र कहते’ हैं।

Explanations:

कपास उपोष्ण तथा उष्णकटिबन्धीय पौधा है। इसके लिए 21 से 25 सेन्टीग्रेड तापमान, 50 से 100 सेन्टीमीटर वर्षा एवं वर्ष में 200 पाला रहित दिनों की आवश्यकता होती है। इसकी खेती के लिए लावा से बनी काली मिट्टी सर्वोत्तम होती है। वैसे मध्य प्रदेश में मन्दसौर, नीमच, रतलाम, झाबुआ, बड़वानी, हरदा, धार, देवास, उज्जैन, रायगढ़, शाजापुर, खण्डवा इत्यादि जगहोें पर कपास की खेती की गयी है। खण्डवा-खरगौन जिले को कपास की खेती के लिए ‘सपेâद सोने का क्षेत्र कहते’ हैं।