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Q: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए– कथन (A) : एरोसॉल जलवायु परिवर्तन करने की क्षमता रखते हैं। कारण (R) : एरोसॉल लघुतरंगें एवं अवरक्त विकिरणों से अन्योन्यक्रिया करते हैं। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
  • A. (A) तथा (R) दोनों सही हैं और (A) का सही स्पष्टीकरण (R) है।
  • B. (A) तथा (R) दोनों सही हैं और (A) का सही स्पष्टीकरण (R) नहीं है।
  • C. (A) सही है तथा (R) गलत है।
  • D. (A) गलत है तथा (R) सही है।
Correct Answer: Option A - एरोसॉल वातावरण में सूक्ष्म कण होते हैं जो जल, बर्फ, राख, खनिज, धूल या अम्लीय बूंदों से बने होते हैं। वातावरणीय एरोसॉल के अंतर्गत ज्वालामुखीय धूल जीवाश्म ईधनों के दोहन से उत्सर्जित राख एवं वनों के जलने से निर्मित कण आदि सभी आते हैं। एरोसॉल जलवायु परिवर्तन की क्षमता रखते हैं एवं एरोसॉल लघु तरंगे एवं अवरक्त विकिरणों से अन्योन्यक्रिया करते हैं। अधिकांश एरोसॉल विकिरण के परावर्तन को बढ़ाकर एल्बिडो में वृद्धि करते हैं जिससे ग्लोबल कूलिंग की संभावना बनती है।
A. एरोसॉल वातावरण में सूक्ष्म कण होते हैं जो जल, बर्फ, राख, खनिज, धूल या अम्लीय बूंदों से बने होते हैं। वातावरणीय एरोसॉल के अंतर्गत ज्वालामुखीय धूल जीवाश्म ईधनों के दोहन से उत्सर्जित राख एवं वनों के जलने से निर्मित कण आदि सभी आते हैं। एरोसॉल जलवायु परिवर्तन की क्षमता रखते हैं एवं एरोसॉल लघु तरंगे एवं अवरक्त विकिरणों से अन्योन्यक्रिया करते हैं। अधिकांश एरोसॉल विकिरण के परावर्तन को बढ़ाकर एल्बिडो में वृद्धि करते हैं जिससे ग्लोबल कूलिंग की संभावना बनती है।

Explanations:

एरोसॉल वातावरण में सूक्ष्म कण होते हैं जो जल, बर्फ, राख, खनिज, धूल या अम्लीय बूंदों से बने होते हैं। वातावरणीय एरोसॉल के अंतर्गत ज्वालामुखीय धूल जीवाश्म ईधनों के दोहन से उत्सर्जित राख एवं वनों के जलने से निर्मित कण आदि सभी आते हैं। एरोसॉल जलवायु परिवर्तन की क्षमता रखते हैं एवं एरोसॉल लघु तरंगे एवं अवरक्त विकिरणों से अन्योन्यक्रिया करते हैं। अधिकांश एरोसॉल विकिरण के परावर्तन को बढ़ाकर एल्बिडो में वृद्धि करते हैं जिससे ग्लोबल कूलिंग की संभावना बनती है।