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Q: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए– 1. कृषि मृदाएं पर्यावरण में नाइट्रोजन के ऑक्साइड निर्मुक्त करती हैं। 2. मवेशी पर्यावरण में अमोनिया निर्मुक्त करते हैं। 3. कुक्कुट उद्योग पर्यावरण में अभिक्रियाशील नाइट्रोजन यौगिक निर्मुक्त करते हैं। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
  • A. केवल 1 और 3
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 2
  • D. 1, 2 और 3
Correct Answer: Option D - कृषि मृदाएं पर्यावरण में नाइट्रोजन के ऑक्साइड निर्मुक्त करती हैं। एक अनुमान के अनुसार भारत में 2010 से कृषि मृदाएं पर्यावरण में लगभग 70 प्रतिशत से अधिक नाइट्रोजन के ऑक्साइडों के उत्सर्जन में योगदान देती है। मवेशियों से पर्यावरण में बड़ी मात्रा में अमोनिया गैस निर्मुक्त होती है। अनुमानत: पर्यावरण में लगभग 80 प्रतिशत अमोनिया का उत्सर्जन मवेशियों से होता है जिसमें 1 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से वृद्धि हो रही है। कुक्कुट उद्योग से बड़ी मात्रा में अभिक्रियाशील नाइट्रोजन यौगिकों का निर्मुक्तिकरण होता है जिसकी मात्रा 2016 में अनुमानत: 0.415 टन थी और 2030 तक यह मात्रा 1.089 टन होने का अनुमान है।
D. कृषि मृदाएं पर्यावरण में नाइट्रोजन के ऑक्साइड निर्मुक्त करती हैं। एक अनुमान के अनुसार भारत में 2010 से कृषि मृदाएं पर्यावरण में लगभग 70 प्रतिशत से अधिक नाइट्रोजन के ऑक्साइडों के उत्सर्जन में योगदान देती है। मवेशियों से पर्यावरण में बड़ी मात्रा में अमोनिया गैस निर्मुक्त होती है। अनुमानत: पर्यावरण में लगभग 80 प्रतिशत अमोनिया का उत्सर्जन मवेशियों से होता है जिसमें 1 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से वृद्धि हो रही है। कुक्कुट उद्योग से बड़ी मात्रा में अभिक्रियाशील नाइट्रोजन यौगिकों का निर्मुक्तिकरण होता है जिसकी मात्रा 2016 में अनुमानत: 0.415 टन थी और 2030 तक यह मात्रा 1.089 टन होने का अनुमान है।

Explanations:

कृषि मृदाएं पर्यावरण में नाइट्रोजन के ऑक्साइड निर्मुक्त करती हैं। एक अनुमान के अनुसार भारत में 2010 से कृषि मृदाएं पर्यावरण में लगभग 70 प्रतिशत से अधिक नाइट्रोजन के ऑक्साइडों के उत्सर्जन में योगदान देती है। मवेशियों से पर्यावरण में बड़ी मात्रा में अमोनिया गैस निर्मुक्त होती है। अनुमानत: पर्यावरण में लगभग 80 प्रतिशत अमोनिया का उत्सर्जन मवेशियों से होता है जिसमें 1 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से वृद्धि हो रही है। कुक्कुट उद्योग से बड़ी मात्रा में अभिक्रियाशील नाइट्रोजन यौगिकों का निर्मुक्तिकरण होता है जिसकी मात्रा 2016 में अनुमानत: 0.415 टन थी और 2030 तक यह मात्रा 1.089 टन होने का अनुमान है।