Explanations:
उपनिषद् का शाब्दिक अर्थ है गुरु के समीप बढ़ना जो कि उपनिषद् के सन्दर्भ में सही है। वैदिक साहित्य के विकास के अंतिम चरण में उपनिषद् ग्रन्थ आते हैं इसी कारण इन्हें वेदान्त भी कहा जाता है। इनमें दर्शनशास्त्र की विवेचना हुयी है, यद्यपि यह शास्त्र यत्र तत्र पहले भी संहिताओं और आरण्यकों में आ चुका है। उपनिषद् दर्शन पर आधारित पुस्तक है, जिसमें प्रथम बार मोक्ष की चर्चा मिलती है। इनमें कुछ क्षत्रिय राजाओं का भी उल्लेख मिलता है। नोट– छांन्दोग्य उपनिषद् में केवल तीन आश्रमों का उल्लेख मिलता है, जबकि जाबालोपनिषद् में चारों आश्रमों का उल्लेख मिलता है।