Explanations:
विकल्पगत क्रमों में इतिहास ग्रंथों का कोई भी क्रम सही नहीं है। इतिहास गं्रथों का कालक्रमानुसार सही क्रम: है- मिश्रबन्धु विनोद (1913)- हिन्दी साहित्य का इतिहास (1929)- हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास (1938)- हिन्दी साहित्य की भूमिका (1940) • मिश्र बंधुओं (गणेश बिहारी, श्याम बिहारी तथा शुकदेव बिहारी मिश्र) ने ‘मिश्रबन्धु विनोद’ नामक इतिहास ग्रंथ की रचना 1913 ई. में चार भागों में किया। • हिन्दी साहित्य का इतिहास- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखा इतिहास ग्रंथ है। शुक्ल जी का इतिहास मूलत: नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित ‘हिन्दी शब्द सागर’ की भूमिका के रूप में ‘हिन्दी-साहित्य का विकास’ के नाम से सन् 1929 ई. में प्रकाशित हुआ। इसमें 1000 कवियों और लेखकों को शामिल किया गया। शुक्ल जी ने काल विभाजन के अन्तर्गत 900 वर्षों के इतिहास को चार सुस्पष्ट काल खण्डों में विभक्त किया है। • हिन्दी साहित्य की भूमिका- (1940) हजारी प्रसाद द्विवेदी का इतिहास ग्रन्थ है। आचार्य द्विवेदी ने अपने इतिहास में परम्परा की निरन्तरता का अनुशीलन करते हुए एक व्यापक इतिहास दर्शन की भूमिका तैयार की। • ‘हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास’ सन् 1938 में लिखा रामकुमार वर्मा का इतिहास ग्रन्थ है। जो सात प्रकरण में विभक्त है।