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Q: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों (89-93) के सटीक उत्तर दीजिए: भारत में अनेक विदेशी जातियाँ आयीं लेकिन भारतीय संस्कृति ने अपने विकास की प्रक्रिया में इन सभी को आत्मसात कर लिया। भारतीय संस्कृति ने अन्य संस्कृतियों के अच्छे गुणों को आत्मसात करके उन्हें अपने रंग रूप में ढाल लिया। विदेशी संस्कृतियों के अच्छे गुण आज भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। भारत ने उत्तम विचार, आचार-व्यवहार और सद्गुणों को ग्रहण करके भारतीय संस्कृति कालजयी बन चुकी है। अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की विशिष्टता रही है। भारत में संसार के लगभग सभी धर्म मिल जाते हैं। भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं:
  • A. विदेशी संस्कृतियों की बुराइयाँ
  • B. विदेशी संस्कृतियों के अच्छे गुण
  • C. विदेशी विचार
  • D. विदेशी जातियाँ
Correct Answer: Option B - दिए गए गद्यांश के अनुसार भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग विदेशी संस्कृतियों के अच्छे गुण है।
B. दिए गए गद्यांश के अनुसार भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग विदेशी संस्कृतियों के अच्छे गुण है।

Explanations:

दिए गए गद्यांश के अनुसार भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग विदेशी संस्कृतियों के अच्छे गुण है।