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Q: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 129-135) के सही/सर्वाधिक उपयुक्त का चयन कीजिए। जीवन में रौनक तब है, जब वह बड़े सहज और सरल तरीके से बिना किसी प्रपंच के जिया जाए। जीवन जैसा निश्छल, निष्कपट है, वैसा ही जिया जाए तो जीना वरदान बना जाता है। जीवन जैसा मिला है उसको हम वैसा की जीते है, तो यह जीवन का सम्मान होता है। अधिकतर हम जैसा जीवन है, उसे छोड़ दिखावे का जीवन जीने लगते हैं। यह दिखावे का जीवन हमें बाहर तो अपने को कुछ बड़ा दिखाने में मदद करता है, लेकिन भीतर से खोखला भी करता चलता है। क्योंकि आडंबर से भरा जीवन अहंकार पर आधारित होता है और अहंकार हमारी जीवंतता को खा जाता है। अहंकार में हम केवल बाहर की तरफ देखकर जीते हैं जबकि जीवन कहीं भीतर वह --- होता है। जीवन का सम्मान कैसे किया जा सकता है?
  • A. जीवन में मिली सब बाधाओं को समाप्त कर।
  • B. जीवन में सुविधाएँ जुटाकर
  • C. उच्च शिक्षा ग्रहण कर।
  • D. जिस रूप में जीवन मिला है, उसे उसी रूप में जीकर।
Correct Answer: Option D - उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार जीवन का सम्मान कैसे किया जा सकता है? का उपयुक्त उत्तर है - जिस रूप में जीवन मिला है उसे उसी रूप में जीकर अत: विकल्प (d) सही है।
D. उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार जीवन का सम्मान कैसे किया जा सकता है? का उपयुक्त उत्तर है - जिस रूप में जीवन मिला है उसे उसी रूप में जीकर अत: विकल्प (d) सही है।

Explanations:

उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार जीवन का सम्मान कैसे किया जा सकता है? का उपयुक्त उत्तर है - जिस रूप में जीवन मिला है उसे उसी रूप में जीकर अत: विकल्प (d) सही है।