Q: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर लिखिए : हिन्दी साहित्य इतिहास को चार भागों में बाँटा गया है। 1. आदिकाल 2. भक्तिकाल 3. रीतिकाल 4. आधुनिक काल भक्तिकाल के संत कवि सूरदास जी को कौन नहीं जानता? भक्तिकाल के कृष्णोपासक सूरदासजी ने सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी, आदि का अनमोल खजाना हिन्दी साहित्य को दिया है। उनके पदों में वात्सल्य, शृंगार एवं शांत रस के भाव प्राप्त होते हैं। उनके लिए कहा गया है कि ‘सूर-सूर तुलसी ससी उडगन केशवदास’ वे अष्टछाप के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। उनके काव्य की विशेषता यह है वे गेय पद है। उनकी अधिकतर रचना, ब्रजभाषा में पायी जाती है कहीं-कहीं पर संस्कृत व फारसी भाषा के शब्द भी पाये जाते हैं। उनकी रचनाओं में अनुप्रास, यमक, श्लेष, उपमा, उत्पे्रक्षा आदि सभी अलंकार पाये जाते हैं। वे जन्मांध थे लेकिन उनके पदों में जो वर्णन पाया जाता है वह सजीव है। ऐसा लगता ही नहीं है कि वे जन्मांध थे। उनकी मृत्यु 1580 ईसवी में हुई थी। हिन्दी साहित्य जगत में वे सदैव अमर हैं। . हिन्दी साहित्य के इतिहास को कितने भागों में बाँटा गया है?
A.
एक
B.
चार
C.
तीन
D.
दो
Correct Answer:
Option B - हिन्दी साहित्य के इतिहास को चार भागों में बाँटा गया है–
आदिकाल– सं. 1050– 1375 वि.
भक्तिकाल– सं. 1375– 1700 वि.
रीतिकाल– सं. 1700 – 1900 वि.
आधुनिक काल – सं. 1900 – 1984 वि.
B. हिन्दी साहित्य के इतिहास को चार भागों में बाँटा गया है–
आदिकाल– सं. 1050– 1375 वि.
भक्तिकाल– सं. 1375– 1700 वि.
रीतिकाल– सं. 1700 – 1900 वि.
आधुनिक काल – सं. 1900 – 1984 वि.
Explanations:
हिन्दी साहित्य के इतिहास को चार भागों में बाँटा गया है–
आदिकाल– सं. 1050– 1375 वि.
भक्तिकाल– सं. 1375– 1700 वि.
रीतिकाल– सं. 1700 – 1900 वि.
आधुनिक काल – सं. 1900 – 1984 वि.
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