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Q: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। (9-15) इस संसार में सब कुछ अस्थायी है। पाप और पुण्य दोनों इस संसार से संबंधित हैं, इसलिए पाप और पुण्य भी अस्थायी हैं। पुण्य सुख देकर और पाप दुख देकर अंत को प्राप्त होता है। लेकिन पाप और पुण्य में थोड़ा अंतर यह है कि पुण्य का फल यदि हम नहीं चाहते तो उस फल को अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। पाप लोहे की जंजीर है जो पुण्य सोने की। बंधन दोनों में है। लोहे की जंजीर से छूटने का आदमी का मन भी करता है लेकिन सोने की जंजीर से जो बंधा हुआ हो उसको वह बंधन प्यारा लगने लगता है। उसमें उसको धन नजर आता है उससे छूटने का मन नहीं करता। पुण्य में उसके फल को :
  • A. हम स्वीकार नहीं भी कर सकते।
  • B. हम स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं।
  • C. किसी दूसरे के लिए उपयोग में ला सकते हैं।
  • D. प्राप्त करना बहुत श्रमसाध्य है।
Correct Answer: Option A - पुण्य में उसके फल को हम स्वीकार नहीं भी कर सकते हैं।
A. पुण्य में उसके फल को हम स्वीकार नहीं भी कर सकते हैं।

Explanations:

पुण्य में उसके फल को हम स्वीकार नहीं भी कर सकते हैं।