Q: निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से दें: (प्र. 61-65) सच्ची मित्रता जितनी बहुमूल्य होती है, उसे बनाए रखना भी उतना ही कठिन है। इस मित्रता को स्थिर और दृढ़ रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक तत्व हैं सहिष्णुता और उदारता। प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कमीं रहती ही है। पूर्ण निर्दोष और सर्वगुण सम्पन्न व्यक्ति कोई भी नहीं होता। अत: मित्र के अवगुणों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। दोष-दर्शन और एक दूसरे पर छींटाकशी से मित्रता में दरार पैदा होने का भय बना रहता है। आज भौतिकवादी युग है। इस युग में सच्चे मित्र का मिलना वैसे भी कठिन है। अधिकतर मित्र अपना उल्लू सीधा करने के लिए मित्रता का स्वाँग रचते हैं और अपना काम बन जाने के बाद अँगूठा दिखाकर चलते बनते है। ऐसे मित्र सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं। अत: शास्त्रों का मत है कि ऐसे मित्र मुख पर अमृत वाले विष से भरे घट के समान त्याज्य हैं। रामचरितमानस में कहा गया है- ‘जे न मित्र दुख होंहि दुखारी। तिन्हहिं विलोकत पातक भारी।I कैसे मित्र विष से भरे घट के समान त्याज्य होते हैं?
A.
जो मित्र सिर्फ अप्रिय वचन बोलते है।
B.
जो मित्र सिर्फ चुप रहते हैं।
C.
जो सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते है।
D.
जो मित्र सिर्फ सच बोलते हैं।
E.
उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer:
Option C - दिए हुए गद्यांश के अनुसार सही उत्तर होगा– ‘जो सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं।’
C. दिए हुए गद्यांश के अनुसार सही उत्तर होगा– ‘जो सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं।’
Explanations:
दिए हुए गद्यांश के अनुसार सही उत्तर होगा– ‘जो सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं।’
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