Correct Answer:
Option C - दिए गए विकल्पों में ‘विषाद’ की गणना सात्विक अनुभाव में नहीं की गई है। ‘विषाद’ संचारी भाव का एक भेद है।
सात्विक अनुभाव- आश्रय के शरीर से उसके बिना किसी बाहरी प्रयत्न के स्वत: उत्पन्न होने वाली चेष्टाएँ सात्विक अनुभाव कहलाती हैं। इसे ‘अयत्नज भाव’ भी कहते हैं।
सात्विक अनुभाव 8 प्रकार के होते हैं। जो निम्न हैं- (1) स्तम्भ (2) स्वेद (3) स्वर भंग (4) वेपथु (5) वैवर्ण्य (6) अश्रुपात (7) रोमांच (8) प्रलय।
C. दिए गए विकल्पों में ‘विषाद’ की गणना सात्विक अनुभाव में नहीं की गई है। ‘विषाद’ संचारी भाव का एक भेद है।
सात्विक अनुभाव- आश्रय के शरीर से उसके बिना किसी बाहरी प्रयत्न के स्वत: उत्पन्न होने वाली चेष्टाएँ सात्विक अनुभाव कहलाती हैं। इसे ‘अयत्नज भाव’ भी कहते हैं।
सात्विक अनुभाव 8 प्रकार के होते हैं। जो निम्न हैं- (1) स्तम्भ (2) स्वेद (3) स्वर भंग (4) वेपथु (5) वैवर्ण्य (6) अश्रुपात (7) रोमांच (8) प्रलय।