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Q: निम्न कथनों पर विचार कीजिए : कथन (A) : पिछले कुछ वर्षों से भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में संविलय तथा अधिग्रहण की घटनाएँ हो रही हैं। कारण (R) : भारत में एकाधिकार एवं प्रतिबंधित व्यापार अधिनियम में पर्याप्त ढील दी गई है। सही उत्तर निम्न कूट में से चुनिए : कूट :
  • A. (A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R),(A) की सही व्याख्या है
  • B. (A) तथा (R) दोनों सत्य हैं किन्तु (R),(A) की सही व्याख्या नहीं है
  • C. (A) सही है, किन्तु (R) गलत है।
  • D. (A) गलत है, किन्तु (R) सही है।
Correct Answer: Option A - पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक एवं व्यापारिक उदारीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने सन् 1969 में पारित किए गए एकाधिकार एवं प्रतिबंधित व्यापार अधिनियम में पर्याप्त ढील दे दी है। जिसके फलस्वरूप भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न कम्पनियों एवं उद्योगों के सम्मिलन और अधिग्रहण की घटनाएँ तेज हो गई है। ज्ञातव्य है कि भारत में 1969 में पारित ‘एकाधिकार तथा प्रतिबंधित व्यापार व्यवहार अधिनियम’ (Monopolies and Restrictive Trade Practices–MRTP–ACT) का मुख्य उद्देश्य आर्थिक शक्ति के केन्द्रीयकरण को रोकना, व्यापारिक एकाधिकार पर नियंत्रण तथा प्रतिबंधात्मक एवं अनुचित व्यापार की रोकथाम करना था। सरकार ने अब इस अधिनियम के प्रावधानों में ढील देते हुए एक प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन किया है।
A. पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक एवं व्यापारिक उदारीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने सन् 1969 में पारित किए गए एकाधिकार एवं प्रतिबंधित व्यापार अधिनियम में पर्याप्त ढील दे दी है। जिसके फलस्वरूप भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न कम्पनियों एवं उद्योगों के सम्मिलन और अधिग्रहण की घटनाएँ तेज हो गई है। ज्ञातव्य है कि भारत में 1969 में पारित ‘एकाधिकार तथा प्रतिबंधित व्यापार व्यवहार अधिनियम’ (Monopolies and Restrictive Trade Practices–MRTP–ACT) का मुख्य उद्देश्य आर्थिक शक्ति के केन्द्रीयकरण को रोकना, व्यापारिक एकाधिकार पर नियंत्रण तथा प्रतिबंधात्मक एवं अनुचित व्यापार की रोकथाम करना था। सरकार ने अब इस अधिनियम के प्रावधानों में ढील देते हुए एक प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन किया है।

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पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक एवं व्यापारिक उदारीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने सन् 1969 में पारित किए गए एकाधिकार एवं प्रतिबंधित व्यापार अधिनियम में पर्याप्त ढील दे दी है। जिसके फलस्वरूप भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न कम्पनियों एवं उद्योगों के सम्मिलन और अधिग्रहण की घटनाएँ तेज हो गई है। ज्ञातव्य है कि भारत में 1969 में पारित ‘एकाधिकार तथा प्रतिबंधित व्यापार व्यवहार अधिनियम’ (Monopolies and Restrictive Trade Practices–MRTP–ACT) का मुख्य उद्देश्य आर्थिक शक्ति के केन्द्रीयकरण को रोकना, व्यापारिक एकाधिकार पर नियंत्रण तथा प्रतिबंधात्मक एवं अनुचित व्यापार की रोकथाम करना था। सरकार ने अब इस अधिनियम के प्रावधानों में ढील देते हुए एक प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन किया है।