Correct Answer:
Option D - ‘‘नमो भगवन्तं वासुदेवम्’’ उपर्युक्तवाक्यस्य शुद्धरूपं ‘नमो भवते वासुदेवाय’ अस्ति। ‘नम: स्वस्ति स्वाहा स्वघाऽलं’ वषड् योगाच्च’ सूत्र से नम: के योग में चतुर्थी विभिक्ति होती है इसलिए नम: के योग में ‘भगवान् वासुदेव’ में चतुर्थी विभक्ति होकर ‘भगवते वासुदेवाय’ रूप बना।
D. ‘‘नमो भगवन्तं वासुदेवम्’’ उपर्युक्तवाक्यस्य शुद्धरूपं ‘नमो भवते वासुदेवाय’ अस्ति। ‘नम: स्वस्ति स्वाहा स्वघाऽलं’ वषड् योगाच्च’ सूत्र से नम: के योग में चतुर्थी विभिक्ति होती है इसलिए नम: के योग में ‘भगवान् वासुदेव’ में चतुर्थी विभक्ति होकर ‘भगवते वासुदेवाय’ रूप बना।