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Q: ‘‘नील परिधान बीच सुकुमार, खिला मृदुल अधखुला अंग खिला ही ज्यों बिजली का फूल , मेघ बन बीच गुलाबी रंग’’ -इन पंक्तियों में कौन सा अलंकार है?
  • A. उपमा
  • B. उत्प्रेक्षा
  • C. रूपक
  • D. दृष्टान्त
Correct Answer: Option B - उत्प्रेक्षा अलंकार - जब उपमेय में उपमान की सम्भावनाओं या कल्पना कर ली जाये, तब उत्प्रेक्षा अलंकार माना जाता है। जैसे- नील परिधान बीच सुकुमार, खिला मृदुल अधखुला अंग खिला हो ज्यों बिजली का फूल , मेघ बन बीच गुलाबी रंग। रूपक अलंकार- जहाँ उपमेय और उपमान में भेदरहित आरोप किया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे- उदित उदय-गिरि मंच पर रघुवर बाल पतंग। विकसेउ सन्त सरोज वन, हरषे लोचन-भुंग।। उपमा अलंकार- जहाँ दो भिन्न वस्तुओं में रूप,गुण आकृति आदि को लेकर समता या तुलना या सादृश्य प्रदर्शित की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। जैसे- उधर गरजती सिंधु लहरियाँ, कुटिल काल के जालो-सी। चली आ रही फेन उगलती, फन फैलाये व्यालो-सी।। दृष्टांत अलंकार-जहाँ उपमेय और उपमान के साधारण धर्म का विम्ब प्रतिबिम्ब भाव दर्शित किया जाये तथा वाचक शब्द का उल्लेख न हो, वहाँ दृष्टान्त अलंकार होता है। जैसे- पगी प्रेम नन्दलाल के, हमै न भावत भोग। मधुप राजपद पाय के, भीख न माँगत लोग।।
B. उत्प्रेक्षा अलंकार - जब उपमेय में उपमान की सम्भावनाओं या कल्पना कर ली जाये, तब उत्प्रेक्षा अलंकार माना जाता है। जैसे- नील परिधान बीच सुकुमार, खिला मृदुल अधखुला अंग खिला हो ज्यों बिजली का फूल , मेघ बन बीच गुलाबी रंग। रूपक अलंकार- जहाँ उपमेय और उपमान में भेदरहित आरोप किया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे- उदित उदय-गिरि मंच पर रघुवर बाल पतंग। विकसेउ सन्त सरोज वन, हरषे लोचन-भुंग।। उपमा अलंकार- जहाँ दो भिन्न वस्तुओं में रूप,गुण आकृति आदि को लेकर समता या तुलना या सादृश्य प्रदर्शित की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। जैसे- उधर गरजती सिंधु लहरियाँ, कुटिल काल के जालो-सी। चली आ रही फेन उगलती, फन फैलाये व्यालो-सी।। दृष्टांत अलंकार-जहाँ उपमेय और उपमान के साधारण धर्म का विम्ब प्रतिबिम्ब भाव दर्शित किया जाये तथा वाचक शब्द का उल्लेख न हो, वहाँ दृष्टान्त अलंकार होता है। जैसे- पगी प्रेम नन्दलाल के, हमै न भावत भोग। मधुप राजपद पाय के, भीख न माँगत लोग।।

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उत्प्रेक्षा अलंकार - जब उपमेय में उपमान की सम्भावनाओं या कल्पना कर ली जाये, तब उत्प्रेक्षा अलंकार माना जाता है। जैसे- नील परिधान बीच सुकुमार, खिला मृदुल अधखुला अंग खिला हो ज्यों बिजली का फूल , मेघ बन बीच गुलाबी रंग। रूपक अलंकार- जहाँ उपमेय और उपमान में भेदरहित आरोप किया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे- उदित उदय-गिरि मंच पर रघुवर बाल पतंग। विकसेउ सन्त सरोज वन, हरषे लोचन-भुंग।। उपमा अलंकार- जहाँ दो भिन्न वस्तुओं में रूप,गुण आकृति आदि को लेकर समता या तुलना या सादृश्य प्रदर्शित की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। जैसे- उधर गरजती सिंधु लहरियाँ, कुटिल काल के जालो-सी। चली आ रही फेन उगलती, फन फैलाये व्यालो-सी।। दृष्टांत अलंकार-जहाँ उपमेय और उपमान के साधारण धर्म का विम्ब प्रतिबिम्ब भाव दर्शित किया जाये तथा वाचक शब्द का उल्लेख न हो, वहाँ दृष्टान्त अलंकार होता है। जैसे- पगी प्रेम नन्दलाल के, हमै न भावत भोग। मधुप राजपद पाय के, भीख न माँगत लोग।।