Correct Answer:
Option C - ‘न प्रभातरलं ज्योतिरुदेति वसुधातलात्’ दुष्यन्तस्य उक्ति:। ‘न प्रभातरलं ज्योतिरुदेति वसुधातलात्’ यह सूक्ति परक वाक्य महाकवि कालिदास प्रणीत अभिज्ञानशाकुन्तलम् के प्रथम अंग में दुष्यन्त के द्वारा कही गयी है। जिसका अर्थ है कान्ति से दैदीप्यमान तेज क्या भूतल से उत्पन्न नहीं होता, अर्थात् होता है।
C. ‘न प्रभातरलं ज्योतिरुदेति वसुधातलात्’ दुष्यन्तस्य उक्ति:। ‘न प्रभातरलं ज्योतिरुदेति वसुधातलात्’ यह सूक्ति परक वाक्य महाकवि कालिदास प्रणीत अभिज्ञानशाकुन्तलम् के प्रथम अंग में दुष्यन्त के द्वारा कही गयी है। जिसका अर्थ है कान्ति से दैदीप्यमान तेज क्या भूतल से उत्पन्न नहीं होता, अर्थात् होता है।