Explanations:
मुद्राराक्षस नाटक के रचयिता विशाखदत्त हैं जो चन्द्रगुप्त-II के समकालीन थे। यह सात अंकों में लिपिबद्ध राजनीतिपरक नाटक है। इसमें मुद्रा (अंगूठी) के द्वारा राक्षस को वश में करने की बात कही गई है। इस कृति में यह स्पष्ट है कि चाणक्य ने किस प्रकार नन्दवंश का नाश किया है। `देवीचन्द्रगुप्त' इनके द्वारा लिखित अन्य नाट्य कृति हैं। शूद्रक की प्रसिद्ध रचना `मृच्छकटिक' एवं कुमारदास की कृति `जानकीहरण' है तथा अमरसिंह की रचना `अमरकोश' है।