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Q: ‘मदनाष्टक’के रचयिता का नाम क्या है?
  • A. केशवदास
  • B. रसखान
  • C. रहीम
  • D. नरोत्तमदास
Correct Answer: Option C - दिये गये रचनाकारों में ‘मदनाष्टक’ के रचयिता रहीमदास जी है। इनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ है- रहीम दोहावली, बरवै नायिका भेद, रास पंचाध्यायी, नगर शोभा। नरोत्तम दास की रचनाएँ हैं- सुदामा चरित, ध्रुवचरित, नाम कीर्तन, विचारमाला। इनकी ‘सुदामा चरित’ ही प्रसिद्ध है। केशवदास प्रमुख रीतिकालीन आचार्य है परन्तु इन्होंने रामाश्रयी काव्यग्रंथों की भी रचना की है, इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- रसिकप्रिया, रामचन्द्रिका (1601), कविप्रिया, रतन बावनी, वीर सिंह देव चरित, विज्ञानगीता, जहाँगीर जस चन्द्रिका, नख शिख, छन्दमाल। रसखान का मूलनाम सैयद इब्राहीम था। भारतेन्दु हरिश्चन्द ने इनके सम्बन्ध में कहा है ‘‘इन मुसलमान हरिजनन पर कोटिक हिन्दुन वारिए।’’ इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं- सुजान रसखान, प्रेमवाटिका, दान लीला, अष्टयाम
C. दिये गये रचनाकारों में ‘मदनाष्टक’ के रचयिता रहीमदास जी है। इनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ है- रहीम दोहावली, बरवै नायिका भेद, रास पंचाध्यायी, नगर शोभा। नरोत्तम दास की रचनाएँ हैं- सुदामा चरित, ध्रुवचरित, नाम कीर्तन, विचारमाला। इनकी ‘सुदामा चरित’ ही प्रसिद्ध है। केशवदास प्रमुख रीतिकालीन आचार्य है परन्तु इन्होंने रामाश्रयी काव्यग्रंथों की भी रचना की है, इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- रसिकप्रिया, रामचन्द्रिका (1601), कविप्रिया, रतन बावनी, वीर सिंह देव चरित, विज्ञानगीता, जहाँगीर जस चन्द्रिका, नख शिख, छन्दमाल। रसखान का मूलनाम सैयद इब्राहीम था। भारतेन्दु हरिश्चन्द ने इनके सम्बन्ध में कहा है ‘‘इन मुसलमान हरिजनन पर कोटिक हिन्दुन वारिए।’’ इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं- सुजान रसखान, प्रेमवाटिका, दान लीला, अष्टयाम

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दिये गये रचनाकारों में ‘मदनाष्टक’ के रचयिता रहीमदास जी है। इनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ है- रहीम दोहावली, बरवै नायिका भेद, रास पंचाध्यायी, नगर शोभा। नरोत्तम दास की रचनाएँ हैं- सुदामा चरित, ध्रुवचरित, नाम कीर्तन, विचारमाला। इनकी ‘सुदामा चरित’ ही प्रसिद्ध है। केशवदास प्रमुख रीतिकालीन आचार्य है परन्तु इन्होंने रामाश्रयी काव्यग्रंथों की भी रचना की है, इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- रसिकप्रिया, रामचन्द्रिका (1601), कविप्रिया, रतन बावनी, वीर सिंह देव चरित, विज्ञानगीता, जहाँगीर जस चन्द्रिका, नख शिख, छन्दमाल। रसखान का मूलनाम सैयद इब्राहीम था। भारतेन्दु हरिश्चन्द ने इनके सम्बन्ध में कहा है ‘‘इन मुसलमान हरिजनन पर कोटिक हिन्दुन वारिए।’’ इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं- सुजान रसखान, प्रेमवाटिका, दान लीला, अष्टयाम