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Q: मैत्री कुत्र न भवितुम् अर्हति?
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  • A. यत्र विश्वास: न वर्तते।
  • B. यत्र असमानता वर्तते।
  • C. यत्र क्रोध: भवति।
  • D. यत्र धनं नास्ति
Correct Answer: Option A - मैत्री `यत्र विश्वास: न वर्तते' तत्र न भवितुम् अर्हति। विश्वासो हि ययोर्मध्ये ततोर्मध्येऽस्ति सौहृदम्। यस्मिन्नैवास्ति विश्वास: तस्मिन् मैत्री क्व सम्भवा।। क्योंकि विश्वास करने वालों के बीच ही मित्रता होता है, जिस पर भरोसा नहीं उसमें दोस्ती कहाँ मुमकिन है।
A. मैत्री `यत्र विश्वास: न वर्तते' तत्र न भवितुम् अर्हति। विश्वासो हि ययोर्मध्ये ततोर्मध्येऽस्ति सौहृदम्। यस्मिन्नैवास्ति विश्वास: तस्मिन् मैत्री क्व सम्भवा।। क्योंकि विश्वास करने वालों के बीच ही मित्रता होता है, जिस पर भरोसा नहीं उसमें दोस्ती कहाँ मुमकिन है।

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मैत्री `यत्र विश्वास: न वर्तते' तत्र न भवितुम् अर्हति। विश्वासो हि ययोर्मध्ये ततोर्मध्येऽस्ति सौहृदम्। यस्मिन्नैवास्ति विश्वास: तस्मिन् मैत्री क्व सम्भवा।। क्योंकि विश्वास करने वालों के बीच ही मित्रता होता है, जिस पर भरोसा नहीं उसमें दोस्ती कहाँ मुमकिन है।