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Q: मृत यवनस्य कञ्चुकात् किं प्राप्तम् ?
  • A. पत्रम्
  • B. रत्नम्
  • C. छुरिका
  • D. मानचित्रम्
Correct Answer: Option A - Aहे. (a) : मृत यवनस्य कञ्चुकात् पत्रम् प्राप्तम्। गौरसिंह यवनयुवक को मारकर उसके कुर्ते में से एक पत्र निकालकर गणों सहित कुटिया में प्रवेश किया। शिवराजविजय पं. अम्बिकादत्त व्यास का एक ऐतिहासिक उपन्यास है। यह तीन विरामों तथा 12 नि:श्वासों में विभक्त है। यह वीर रस प्रधान काव्य है इसके नायक ‘शिवाजी हैं। विरोधाभास व्यास जी का प्रिय अलंकार है। शिवराजविजयम् में पाञ्चाली रीति प्रयुक्त है।
A. Aहे. (a) : मृत यवनस्य कञ्चुकात् पत्रम् प्राप्तम्। गौरसिंह यवनयुवक को मारकर उसके कुर्ते में से एक पत्र निकालकर गणों सहित कुटिया में प्रवेश किया। शिवराजविजय पं. अम्बिकादत्त व्यास का एक ऐतिहासिक उपन्यास है। यह तीन विरामों तथा 12 नि:श्वासों में विभक्त है। यह वीर रस प्रधान काव्य है इसके नायक ‘शिवाजी हैं। विरोधाभास व्यास जी का प्रिय अलंकार है। शिवराजविजयम् में पाञ्चाली रीति प्रयुक्त है।

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Aहे. (a) : मृत यवनस्य कञ्चुकात् पत्रम् प्राप्तम्। गौरसिंह यवनयुवक को मारकर उसके कुर्ते में से एक पत्र निकालकर गणों सहित कुटिया में प्रवेश किया। शिवराजविजय पं. अम्बिकादत्त व्यास का एक ऐतिहासिक उपन्यास है। यह तीन विरामों तथा 12 नि:श्वासों में विभक्त है। यह वीर रस प्रधान काव्य है इसके नायक ‘शिवाजी हैं। विरोधाभास व्यास जी का प्रिय अलंकार है। शिवराजविजयम् में पाञ्चाली रीति प्रयुक्त है।