Correct Answer:
Option D - `मातु: स्मरति' में रेखाङ्कित पद `मातु:' में `अधीगर्थदयेशां कर्मणि' सूत्र से षष्ठी विभक्ति हुई है। इस सूत्र का अर्थ है – अधिपूर्वक `इ' धातु (स्मरण करना), दय् (दया करना), ईश् (समर्थ होना) तथा ऐसा ही अर्थ वाली अन्य धातुओं के कर्म में षष्ठी विभक्ति होती है।
D. `मातु: स्मरति' में रेखाङ्कित पद `मातु:' में `अधीगर्थदयेशां कर्मणि' सूत्र से षष्ठी विभक्ति हुई है। इस सूत्र का अर्थ है – अधिपूर्वक `इ' धातु (स्मरण करना), दय् (दया करना), ईश् (समर्थ होना) तथा ऐसा ही अर्थ वाली अन्य धातुओं के कर्म में षष्ठी विभक्ति होती है।