Correct Answer:
Option A - ऐसी कम्पनियां जो अपने लाभ-हानि लेखाओं में लाभ तो प्राप्त करती हैं किन्तु आय की गणना, इनकम टैक्स नियमों के अनुसार होने पर कुल आय शून्य या नगण्य प्राप्त होती है जिस पर ये शून्य अथवा नाममात्र का कर भुगतान करती हैं, ‘जीरो टैक्स कम्पनियां’ कहलाती हैं। इन शून्य कर कम्पनियों (जीरो टैक्स कम्पनियों) को कराधीन लाने हेतु इन पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) आरोपित किया जाता है। इसका प्रावधान वर्ष 1987 के वित्त अधिनियम के द्वारा किया गया हैं।
A. ऐसी कम्पनियां जो अपने लाभ-हानि लेखाओं में लाभ तो प्राप्त करती हैं किन्तु आय की गणना, इनकम टैक्स नियमों के अनुसार होने पर कुल आय शून्य या नगण्य प्राप्त होती है जिस पर ये शून्य अथवा नाममात्र का कर भुगतान करती हैं, ‘जीरो टैक्स कम्पनियां’ कहलाती हैं। इन शून्य कर कम्पनियों (जीरो टैक्स कम्पनियों) को कराधीन लाने हेतु इन पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) आरोपित किया जाता है। इसका प्रावधान वर्ष 1987 के वित्त अधिनियम के द्वारा किया गया हैं।