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Q: मानवीय क्षमताएँ जैसे कि – बुद्धि, समस्या-समाधान और समालोचनात्मक चिंतन का सापेक्ष रूप से विकास के किस क्षेत्र के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है?
  • A. शारीरिक
  • B. संवेगात्मक
  • C. संज्ञानात्मक
  • D. नैतिक
Correct Answer: Option C - मानवीय क्षमताएँ जैसे कि- बुद्धि, समस्या-समाधान और समालोचनात्मक चिंतन का सापेक्ष रूप से विकास के संज्ञानात्मक क्षेत्र के अतंर्गत अध्ययन किया जाता है। संज्ञानात्मक क्षेत्र के अंन्तर्गत मानसिक क्रियाओं के द्वारा अधिगम को प्राप्त करते है। संज्ञान के अंतर्गत ज्ञान, संवेदना, समग्रता, विश्लेषण, संश्लेषण, मूल्यांकन, प्रत्यक्षीकरण, कल्पना, तर्क, चिंतन, अनुप्रयोग, स्मृति, बौद्धिक क्षमता इत्यादि आते हैं। संज्ञान एक मानसिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति – • जानकारी को प्राप्त करता है। • समस्या का हल निकालता है। • चितंन एवं तर्वâ करता है। • दो वस्तुओं के बीच विभेद करता है। • संकल्पना को याद करता है। • यह विकास की प्रक्रिया व्यक्तिगत होती है। • संज्ञानात्मक विकास से बालक में सीखने की क्षमता बढ़ती है। • संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का विकास शैशवावस्था से पहले ही प्रारम्भ हो जाता है।
C. मानवीय क्षमताएँ जैसे कि- बुद्धि, समस्या-समाधान और समालोचनात्मक चिंतन का सापेक्ष रूप से विकास के संज्ञानात्मक क्षेत्र के अतंर्गत अध्ययन किया जाता है। संज्ञानात्मक क्षेत्र के अंन्तर्गत मानसिक क्रियाओं के द्वारा अधिगम को प्राप्त करते है। संज्ञान के अंतर्गत ज्ञान, संवेदना, समग्रता, विश्लेषण, संश्लेषण, मूल्यांकन, प्रत्यक्षीकरण, कल्पना, तर्क, चिंतन, अनुप्रयोग, स्मृति, बौद्धिक क्षमता इत्यादि आते हैं। संज्ञान एक मानसिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति – • जानकारी को प्राप्त करता है। • समस्या का हल निकालता है। • चितंन एवं तर्वâ करता है। • दो वस्तुओं के बीच विभेद करता है। • संकल्पना को याद करता है। • यह विकास की प्रक्रिया व्यक्तिगत होती है। • संज्ञानात्मक विकास से बालक में सीखने की क्षमता बढ़ती है। • संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का विकास शैशवावस्था से पहले ही प्रारम्भ हो जाता है।

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मानवीय क्षमताएँ जैसे कि- बुद्धि, समस्या-समाधान और समालोचनात्मक चिंतन का सापेक्ष रूप से विकास के संज्ञानात्मक क्षेत्र के अतंर्गत अध्ययन किया जाता है। संज्ञानात्मक क्षेत्र के अंन्तर्गत मानसिक क्रियाओं के द्वारा अधिगम को प्राप्त करते है। संज्ञान के अंतर्गत ज्ञान, संवेदना, समग्रता, विश्लेषण, संश्लेषण, मूल्यांकन, प्रत्यक्षीकरण, कल्पना, तर्क, चिंतन, अनुप्रयोग, स्मृति, बौद्धिक क्षमता इत्यादि आते हैं। संज्ञान एक मानसिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति – • जानकारी को प्राप्त करता है। • समस्या का हल निकालता है। • चितंन एवं तर्वâ करता है। • दो वस्तुओं के बीच विभेद करता है। • संकल्पना को याद करता है। • यह विकास की प्रक्रिया व्यक्तिगत होती है। • संज्ञानात्मक विकास से बालक में सीखने की क्षमता बढ़ती है। • संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का विकास शैशवावस्था से पहले ही प्रारम्भ हो जाता है।