search
Q: मूल्यांकन को–
  • A. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक भाग होना चाहिए।
  • B. केवल नम्बरों के संदर्भ में करना चाहिए।
  • C. वस्तुनिष्ठ प्रकार के लिखित कार्यों पर आधारित होना चाहिए।
  • D. एक अलग गतिविधि के रूप में लेना चाहिए।
Correct Answer: Option A - मूल्यांकन को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक भाग होना चाहिए। मूल्यांकन एक सतत् प्रक्रिया है तथा यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है। सतत् का तात्पर्य निरन्तर से है। इसका अर्थ है, आकलन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में एक नियमित गतिविधि बनाना। सतत् मूल्यांकन में छात्रों के प्रदर्शन को औपचारिक तथा अनौपचारिक तरीके से आँका जाता है। यह शिक्षण के साथ-साथ चलता रहता है। छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए शिक्षक अवलोकन, साक्षात्कार, स्व तथा सहपाठी आकलन, समूह कार्य, परियोजना आदि विभिन्न तकनीकों का प्रयोग करते हैं।
A. मूल्यांकन को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक भाग होना चाहिए। मूल्यांकन एक सतत् प्रक्रिया है तथा यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है। सतत् का तात्पर्य निरन्तर से है। इसका अर्थ है, आकलन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में एक नियमित गतिविधि बनाना। सतत् मूल्यांकन में छात्रों के प्रदर्शन को औपचारिक तथा अनौपचारिक तरीके से आँका जाता है। यह शिक्षण के साथ-साथ चलता रहता है। छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए शिक्षक अवलोकन, साक्षात्कार, स्व तथा सहपाठी आकलन, समूह कार्य, परियोजना आदि विभिन्न तकनीकों का प्रयोग करते हैं।

Explanations:

मूल्यांकन को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक भाग होना चाहिए। मूल्यांकन एक सतत् प्रक्रिया है तथा यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है। सतत् का तात्पर्य निरन्तर से है। इसका अर्थ है, आकलन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में एक नियमित गतिविधि बनाना। सतत् मूल्यांकन में छात्रों के प्रदर्शन को औपचारिक तथा अनौपचारिक तरीके से आँका जाता है। यह शिक्षण के साथ-साथ चलता रहता है। छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए शिक्षक अवलोकन, साक्षात्कार, स्व तथा सहपाठी आकलन, समूह कार्य, परियोजना आदि विभिन्न तकनीकों का प्रयोग करते हैं।