Correct Answer:
Option A - मूल्य विभेदीकरण का अर्थ है कि तकनीकी दृष्टि से समरूप पदार्थों को इतनी भिन्न-भिन्न कीमतों पर बेचना जो उनकी सीमांत लागतों के अनुपात से कही अधिक हैं।
मूल्य विभेदीकरण की तीन कोटि हैं–
(i) प्रथम कोटि का मूल्य विभेदीकरण
(ii) द्वितीय कोटि का मूल्य विभेदीकरण
(iii) तृतीय कोटि का मूल्य विभेदीकरण
प्रथम कोटि अथवा पूर्ण मूल्य विभेदीकरण के अंतर्गत उपभोक्ता का अतिरेक अनुपस्थित होता है। इस कोटि में वस्तु की कीमत और सीमांत आय परस्पर समान होते हैं।
A. मूल्य विभेदीकरण का अर्थ है कि तकनीकी दृष्टि से समरूप पदार्थों को इतनी भिन्न-भिन्न कीमतों पर बेचना जो उनकी सीमांत लागतों के अनुपात से कही अधिक हैं।
मूल्य विभेदीकरण की तीन कोटि हैं–
(i) प्रथम कोटि का मूल्य विभेदीकरण
(ii) द्वितीय कोटि का मूल्य विभेदीकरण
(iii) तृतीय कोटि का मूल्य विभेदीकरण
प्रथम कोटि अथवा पूर्ण मूल्य विभेदीकरण के अंतर्गत उपभोक्ता का अतिरेक अनुपस्थित होता है। इस कोटि में वस्तु की कीमत और सीमांत आय परस्पर समान होते हैं।