Correct Answer:
Option B - ``मखेष्वखिन्नोऽनुमत:’’ पुरोधस्य धिनोति हव्येन हिरण्यरेतसम'' प्रस्तुत श्लोकांश का अर्थ हवि से अग्नि को तृप्त करता रहता है। `हिरण्येतसम' का तात्पर्य अग्नि है। प्रस्तुत श्लोकांश किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग से लिया गया है।
B. ``मखेष्वखिन्नोऽनुमत:’’ पुरोधस्य धिनोति हव्येन हिरण्यरेतसम'' प्रस्तुत श्लोकांश का अर्थ हवि से अग्नि को तृप्त करता रहता है। `हिरण्येतसम' का तात्पर्य अग्नि है। प्रस्तुत श्लोकांश किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग से लिया गया है।