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Q: मिक्सोडिमा निम्न की कमी से होता है:
  • A. लौह तत्व
  • B. राईबोफ्लैविन
  • C. पाइरिडोक्सिन
  • D. आयोडीन
Correct Answer: Option D - मिक्सोडिमा आयोडीन की कमी से होता है। शरीर गठन संबंधी रोग है जो थायरॉइड ग्रंथि की न्यून क्रिया के कारण उत्पन्न होता है। थाइरॉइड रस की कमी के कारण विभिन्न आयु में विभिन्न लक्षण दिखाई पड़ते है। अत: आयु के अनुसार मिक्सोडिमा के विभिन्न नाम भी है। भ्रूणावस्था या शिशुकाल में होने वाला रोग जड़मनता, यौनारंभ काल में होने वाला वयस्क मिक्सोडिमा कहलाता है। वैसे मिक्सोडिमा दो प्रकार का होता है। प्रथम प्रकार थायरॉइड रस की कमी का कारण थाइरॉइड ग्रंथि का रोग होेता है। जिससे यह ग्रंथि रस बनाने की अपनी सामान्य क्रिया नहीं कर पाती है तथा दूसरे प्रकार में शल्य क्रिया सें जब थायरॉइड ग्रंथि काट दी गई हों तब रस की कमी या रस की अनुपस्थिति हो जाती है। पुरूषों की अपेक्षा स्त्रियां इस रोग से अधिक पीड़ित रहती है। एक ही वंश के रोगियों में यह रोग बहुधा मिलता है तथा माता-पिता द्वारा संचारित होता है। गलगंड के स्थानिकमारी स्थान में माँ के शरीर में आयोडीन की कमी से शिशु की थाइरॉइड ग्रंथि का पूर्ण विकास न होने पर शिशु को यह रोग हो सकता है।
D. मिक्सोडिमा आयोडीन की कमी से होता है। शरीर गठन संबंधी रोग है जो थायरॉइड ग्रंथि की न्यून क्रिया के कारण उत्पन्न होता है। थाइरॉइड रस की कमी के कारण विभिन्न आयु में विभिन्न लक्षण दिखाई पड़ते है। अत: आयु के अनुसार मिक्सोडिमा के विभिन्न नाम भी है। भ्रूणावस्था या शिशुकाल में होने वाला रोग जड़मनता, यौनारंभ काल में होने वाला वयस्क मिक्सोडिमा कहलाता है। वैसे मिक्सोडिमा दो प्रकार का होता है। प्रथम प्रकार थायरॉइड रस की कमी का कारण थाइरॉइड ग्रंथि का रोग होेता है। जिससे यह ग्रंथि रस बनाने की अपनी सामान्य क्रिया नहीं कर पाती है तथा दूसरे प्रकार में शल्य क्रिया सें जब थायरॉइड ग्रंथि काट दी गई हों तब रस की कमी या रस की अनुपस्थिति हो जाती है। पुरूषों की अपेक्षा स्त्रियां इस रोग से अधिक पीड़ित रहती है। एक ही वंश के रोगियों में यह रोग बहुधा मिलता है तथा माता-पिता द्वारा संचारित होता है। गलगंड के स्थानिकमारी स्थान में माँ के शरीर में आयोडीन की कमी से शिशु की थाइरॉइड ग्रंथि का पूर्ण विकास न होने पर शिशु को यह रोग हो सकता है।

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मिक्सोडिमा आयोडीन की कमी से होता है। शरीर गठन संबंधी रोग है जो थायरॉइड ग्रंथि की न्यून क्रिया के कारण उत्पन्न होता है। थाइरॉइड रस की कमी के कारण विभिन्न आयु में विभिन्न लक्षण दिखाई पड़ते है। अत: आयु के अनुसार मिक्सोडिमा के विभिन्न नाम भी है। भ्रूणावस्था या शिशुकाल में होने वाला रोग जड़मनता, यौनारंभ काल में होने वाला वयस्क मिक्सोडिमा कहलाता है। वैसे मिक्सोडिमा दो प्रकार का होता है। प्रथम प्रकार थायरॉइड रस की कमी का कारण थाइरॉइड ग्रंथि का रोग होेता है। जिससे यह ग्रंथि रस बनाने की अपनी सामान्य क्रिया नहीं कर पाती है तथा दूसरे प्रकार में शल्य क्रिया सें जब थायरॉइड ग्रंथि काट दी गई हों तब रस की कमी या रस की अनुपस्थिति हो जाती है। पुरूषों की अपेक्षा स्त्रियां इस रोग से अधिक पीड़ित रहती है। एक ही वंश के रोगियों में यह रोग बहुधा मिलता है तथा माता-पिता द्वारा संचारित होता है। गलगंड के स्थानिकमारी स्थान में माँ के शरीर में आयोडीन की कमी से शिशु की थाइरॉइड ग्रंथि का पूर्ण विकास न होने पर शिशु को यह रोग हो सकता है।