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Q: Mahavira Jain used which language to preach his teachings? महावीर जैन ने अपने उपदेशों के प्रचार के लिए किस भाषा का प्रयोग किया?
  • A. Prakrit / प्राकृत
  • B. Sanskrit / संस्कृत
  • C. Pali / पालि
  • D. Magadhi / मगधी
Correct Answer: Option A - महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्धमान था। 30 वर्ष की अवस्था में ये तपस्या करने घर से निकल पड़े। 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद वैशाख मास के 10वें दिन जृम्भिक ग्राम के समीप ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे उहें कैवल्य (ज्ञान) प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ‘केवलिन’, ‘जिन (विजेता)’, अर्हत (योग्य) तथा ‘निग्रन्थ’ (बन्धन रहित) कहलाये। महावीर स्वामी ने अपने उपदेशों के प्रचार के लिए प्राकृत या अर्द्धमागधी भाषाओं का प्रयोग किया।
A. महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्धमान था। 30 वर्ष की अवस्था में ये तपस्या करने घर से निकल पड़े। 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद वैशाख मास के 10वें दिन जृम्भिक ग्राम के समीप ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे उहें कैवल्य (ज्ञान) प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ‘केवलिन’, ‘जिन (विजेता)’, अर्हत (योग्य) तथा ‘निग्रन्थ’ (बन्धन रहित) कहलाये। महावीर स्वामी ने अपने उपदेशों के प्रचार के लिए प्राकृत या अर्द्धमागधी भाषाओं का प्रयोग किया।

Explanations:

महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्धमान था। 30 वर्ष की अवस्था में ये तपस्या करने घर से निकल पड़े। 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद वैशाख मास के 10वें दिन जृम्भिक ग्राम के समीप ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे उहें कैवल्य (ज्ञान) प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ‘केवलिन’, ‘जिन (विजेता)’, अर्हत (योग्य) तथा ‘निग्रन्थ’ (बन्धन रहित) कहलाये। महावीर स्वामी ने अपने उपदेशों के प्रचार के लिए प्राकृत या अर्द्धमागधी भाषाओं का प्रयोग किया।