Correct Answer:
Option C - `मेघदूतम्' गीतिकाव्य या खण्डकाव्य का उज्ज्वल माणिक्य है। यह कालिदास की प्रौढ़ एवं परिष्कृत कृति है। इसमें कवि की प्रौढ़ कल्पना, उदात्त भावना, परिष्कृत शैली एवं कोमलकान्त पदावली का सामञ्जस्य दिखाई देता है। इसमें 115 पद्य हैं। यह दो भागों में विभक्त है – पूर्वमेघ और उत्तरमेघ। पूर्वमेघ में 63 श्लोक हैं और उत्तरमेघ में 52।
C. `मेघदूतम्' गीतिकाव्य या खण्डकाव्य का उज्ज्वल माणिक्य है। यह कालिदास की प्रौढ़ एवं परिष्कृत कृति है। इसमें कवि की प्रौढ़ कल्पना, उदात्त भावना, परिष्कृत शैली एवं कोमलकान्त पदावली का सामञ्जस्य दिखाई देता है। इसमें 115 पद्य हैं। यह दो भागों में विभक्त है – पूर्वमेघ और उत्तरमेघ। पूर्वमेघ में 63 श्लोक हैं और उत्तरमेघ में 52।