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Q: मेघदूतम् इति काव्ये प्रयुक्तं छन्द: अस्ति-
  • A. वंशस्थ:
  • B. स्रग्धरा
  • C. मालिनी
  • D. मन्दाक्रान्ता
Correct Answer: Option D - महाकवि कालिदास विरचित मेघदूतम् में आद्योपान्त मन्दाक्रान्ता छन्द का प्रयोग किया गया है। मन्दाक्रान्ता छन्द का लक्षण इस प्रकार है– ‘‘मन्दाक्रान्ता जलधि षडगैम्र्भौनतौ ताद् गुरु चेद्।’’ अर्थात् जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमश: मगण, भगण, नगण, तगण, तथा दो गुरु वर्ण आयें और जलधि (4) षट् (6) एवं अग (7) वर्णों पर यति हो उसे मन्दाक्रान्ता छन्द कहते हैं।
D. महाकवि कालिदास विरचित मेघदूतम् में आद्योपान्त मन्दाक्रान्ता छन्द का प्रयोग किया गया है। मन्दाक्रान्ता छन्द का लक्षण इस प्रकार है– ‘‘मन्दाक्रान्ता जलधि षडगैम्र्भौनतौ ताद् गुरु चेद्।’’ अर्थात् जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमश: मगण, भगण, नगण, तगण, तथा दो गुरु वर्ण आयें और जलधि (4) षट् (6) एवं अग (7) वर्णों पर यति हो उसे मन्दाक्रान्ता छन्द कहते हैं।

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महाकवि कालिदास विरचित मेघदूतम् में आद्योपान्त मन्दाक्रान्ता छन्द का प्रयोग किया गया है। मन्दाक्रान्ता छन्द का लक्षण इस प्रकार है– ‘‘मन्दाक्रान्ता जलधि षडगैम्र्भौनतौ ताद् गुरु चेद्।’’ अर्थात् जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमश: मगण, भगण, नगण, तगण, तथा दो गुरु वर्ण आयें और जलधि (4) षट् (6) एवं अग (7) वर्णों पर यति हो उसे मन्दाक्रान्ता छन्द कहते हैं।