Correct Answer:
Option B - मेघदूतम् में यक्ष ‘वक्र: पन्था यदपि भवत:’ आदि कहकर मेघ से उज्जयिनी नगरी जाने का अनुरोध करता है। सम्पूर्ण पद्य इस प्रकार है –
‘‘वक्र: पन्था यदपि भवत: प्रस्थितस्योत्तराशां।
सौधोत्सङ्गप्रणयविमुखो मा स्म भूरुज्जयिन्या:।।
B. मेघदूतम् में यक्ष ‘वक्र: पन्था यदपि भवत:’ आदि कहकर मेघ से उज्जयिनी नगरी जाने का अनुरोध करता है। सम्पूर्ण पद्य इस प्रकार है –
‘‘वक्र: पन्था यदपि भवत: प्रस्थितस्योत्तराशां।
सौधोत्सङ्गप्रणयविमुखो मा स्म भूरुज्जयिन्या:।।