Correct Answer:
Option B - सीमांत राजस्व का मान धनात्मक होने पर मांग वक्र लोचदार होता है और सीमांत राजस्व का मान ऋणात्मक होने पर यह बेलोचदार होता है अर्थात जब मूल्य वृद्धि के कारण वस्तुओ की माँग में तीव्र गिरावट आती है, तो इस परिदृश्य को लोचदार मांग कहते हैं। इसके अलावा, जब कीमत में कमी से मांग में वृद्धि हो, तो बाजार के व्यवहार को लोचदार माना जाता है, और यदि मूल्य परिवर्तन किसी वस्तु की माँग को प्रभावित नही करता, तो इसे बेलोचदार मांग कहते है।
B. सीमांत राजस्व का मान धनात्मक होने पर मांग वक्र लोचदार होता है और सीमांत राजस्व का मान ऋणात्मक होने पर यह बेलोचदार होता है अर्थात जब मूल्य वृद्धि के कारण वस्तुओ की माँग में तीव्र गिरावट आती है, तो इस परिदृश्य को लोचदार मांग कहते हैं। इसके अलावा, जब कीमत में कमी से मांग में वृद्धि हो, तो बाजार के व्यवहार को लोचदार माना जाता है, और यदि मूल्य परिवर्तन किसी वस्तु की माँग को प्रभावित नही करता, तो इसे बेलोचदार मांग कहते है।